Agriculture: आलू की बुवाई का ये तरीका देगा बंपर उत्पादन! मेहनत लगेगी कम, लागत भी होगी आधी, जानें विधि
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Aalu Ki Buwai: आधुनिक खेती के इस दौर में अब किसान आलू की बुवाई भी मशीनों की मदद से करने लगे हैं. इससे न सिर्फ मेहनत और लागत घट रही है बल्कि पैदावार भी पहले से कहीं ज्यादा हो रही है. गोंडा के किसान घनश्याम उपाध्याय ने इस विधि से खेती कर दिखाया है कि तकनीक अपनाकर खेती में बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है.
गोंडा: खेती अब केवल मेहनत का नहीं, समझदारी का काम बनती जा रही है. पहले जहां किसान पारंपरिक तरीकों से आलू की बुवाई करते थे, वहीं अब वे आधुनिक मशीनों की मदद से आलू की खेती कर रहे हैं. मशीन से की गई आलू की बुवाई न केवल उत्पादन बढ़ा रही है बल्कि समय और मेहनत दोनों की बचत भी कर रही है.
मशीन से कैसे होती है आलू की बुवाई?
पहले किसान हाथ से आलू की बुवाई करते थे जिससे समय और मजदूरी दोनों ज्यादा लगती थी. लेकिन अब Potato Planter (आलू रोपण मशीन) की मदद से खेत में आसानी से बुवाई की जा सकती है. यह मशीन ट्रैक्टर से जुड़ती है और बीज आलू को तय दूरी और गहराई पर मिट्टी में डाल देती है.
इस मशीन में बीज रखने का टैंक होता है और यह हर कतार में एकसमान दूरी पर बीज गिराती है. इससे पौधों की बढ़वार समान रूप से होती है और उत्पादन बढ़ जाता है. घनश्याम उपाध्याय बताते हैं कि उन्होंने आठवीं तक पढ़ाई की थी, उसके बाद पढ़ाई छोड़कर खेती को ही अपना करियर बना लिया. आज वे गोंडा के सफल किसानों में से एक हैं.
वे बताते हैं कि पहले वह हाथ से आलू की बुवाई करवाते थे, लेकिन अब मशीन से करवाने लगे हैं. इससे समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.
आलू की बुवाई का सही समय
घनश्याम उपाध्याय बताते हैं कि उन्हें मशीन से आलू की बुवाई करने का आइडिया पानी संस्थान के माध्यम से मिला. पहले वे पारंपरिक तरीके से बुवाई करते थे जिसमें लागत और मेहनत ज्यादा लगती थी. अब उन्होंने इस बार पोखरी पुखराज वैरायटी के आलू की बुवाई की है.
आलू की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है. इस समय मौसम ठंडा और हल्की नमी वाला होता है जो आलू के अंकुरण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है.
मशीन से बुवाई के बड़े फायदे
मशीन से आलू की बुवाई करने के कई फायदे हैं, जिन्हें किसान घनश्याम उपाध्याय ने खुद अनुभव किया है.
• कम समय में ज्यादा काम: एक मशीन दिनभर में लगभग 4 से 5 एकड़ तक बुवाई कर सकती है.
• मजदूरी की बचत: जहां हाथ से बुवाई में 10-12 मजदूर लगते हैं, वहीं मशीन से केवल 2-3 लोग ही काफी होते हैं.
• बीज की बचत: मशीन से एक समान दूरी पर बीज गिरने से 10–15% तक बीज की बचत होती है.
• उपज में बढ़ोतरी: पौधों की एकसमान वृद्धि होने से 20–25% तक उत्पादन बढ़ता है.
• जुताई और बुवाई एक साथ: कुछ आधुनिक मशीनें खेत की जुताई और बुवाई दोनों काम एक साथ कर देती हैं.
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें
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