Agriculture Tips: आखिर पुराने लोग बैल से क्यों करते हैं खेत की जुताई, क्या सच में बढ़ती है उत्पादकता? एक्सपर्ट से जानें

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Agriculture Tips: आखिर पुराने लोग बैल से क्यों करते हैं खेत की जुताई, क्या सच में बढ़ती है उत्पादकता? एक्सपर्ट से जानें


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बदलते दौर और महंगाई के हिसाब से किसान बैल की खेती से परहेज करते हैं, लेकिन बैल की खेती करने से मृदा प्रदूषण से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही जमीन में जो मिट्टी दब जाती है, वह मिट्टी दबने के बजाय भुरभुरी हो जाती है.

अमेठी: आज आधुनिकता का दौर है और इस आधुनिकता के दौर में खेती किसानी में हम हाईटेक कृषि यंत्र का इस्तेमाल कर अपनी खेती-किसानी को कर रहे हैं, लेकिन इसी हाईटेक और आधुनिकता के दौर में आज परंपरागत पुरानी खेती भी होती है. इस खेती के इतने फायदे हैं कि आप गिनते-गिनते थक जाएंगे.

मृदा प्रदूषण से मुक्ति, अन्य भी फायदे

बदलते दौर और महंगाई के हिसाब से किसान बैल की खेती से परहेज करते हैं, लेकिन बैल की खेती करने से मृदा प्रदूषण से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही जमीन में जो मिट्टी दब जाती है, वह मिट्टी दबने के बजाय भुरभुरी हो जाती है. इसके साथ ही बैल हमें खाद देते हैं, जिससे कृषि मजबूत होती है और रसायन खाद से छुटकारा मिलता है.

परंपरागत खेती को भूल रहे किसान

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक और एक्सपर्ट डॉ. लाल पंकज सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि आज आधुनिकता का दौर है. किसान मेहनत कम करना चाहते हैं. ऐसे में परंपरागत खेती को किसान भूल रहे हैं, लेकिन बैल आधारित खेती हमारी परंपरागत खेती है. इससे हमें बहुत सारे फायदे हैं. आधुनिकता का दौर भले हैं, लेकिन परंपरागत खेती में यह खेती बहुत ही फायदा देती है. इसके साथ ही मृदा प्रदूषण से बचाती है, मृदा में ऑक्सीजन की कमी नहीं होती है.

डॉ. लाल पंकज सिंह ने आगे बताया कि इसके साथ नाइट्रोजन और फास्फोरस सहित जो महत्वपूर्ण कण होते हैं, वह भी आसानी से मृदा में उपलब्ध होते हैं. इससे हमारी जो भी फसल तैयार होती है, वह कीटाणु मुक्त होती है. इसके साथ ही फसल में किसी भी प्रकार की समस्या पैदावार से लेकर उत्पादन तक में समस्या नहीं होती, यह बहुत ही अच्छी खेती है. जो किसान इसे कर रहे हैं, वह बहुत ही सराहनीय काम है. मेरी यही सलाह है कि खेती में बैल का इस्तेमाल किया जाए.

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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Agriculture Tips: पुराने लोग बैल से क्यों करते हैं खेत की जुताई, यहां जानें?



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