Ayodhya News : कलयुग में भी त्रेता युग जीवंत! अयोध्या से भरत और शत्रुघ्न निकले चित्रकूट, जानें वजह

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Ayodhya News : कलयुग में भी त्रेता युग जीवंत! अयोध्या से भरत और शत्रुघ्न निकले चित्रकूट, जानें वजह


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Ayodhya Latest News : मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या से आज परंपरा और भक्ति का संगम बनी भरत मिलाप यात्रा निकली. 50 वर्षों से छोटी छावनी मंदिर से निकाली जाने वाली यह यात्रा वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों के बीच चित्रकूट के लिए रवाना हुई.

अयोध्या : मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या से आज भक्ति, परंपरा और संस्कृति का संगम बनी भरत मिलाप यात्रा धूमधाम से निकाली गई. यह यात्रा पिछले 50 वर्षों से छोटी छावनी मंदिर से निरंतर निकाली जा रही है. वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के बीच यात्रा की शुरुआत हुई, जो 10 नवंबर को चित्रकूट पहुंचेगी. वहां प्रभु श्रीराम से प्रतीकात्मक मिलन समारोह संपन्न होगा, जहां भरत और शत्रुघ्न प्रभु श्रीराम को अयोध्या लौटने का अनुरोध करेंगे.

कहा जाता है कि त्रेता युग में 14 वर्ष के वनवास के दौरान जब श्रीराम चित्रकूट में थे, तब भरत और शत्रुघ्न अयोध्यावासियों संग उन्हें वापस लाने पहुंचे थे. उसी ऐतिहासिक प्रसंग की स्मृति में यह यात्रा हर वर्ष धूमधाम से निकाली जाती है. अयोध्या के महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने बताया कि यह यात्रा अयोध्या की अनूठी सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है, जो रामायणकालीन भावनाओं को जीवंत करती है. यात्रा में इस बार भी भरत और शत्रुघ्न के स्वरूप में सजे पात्र आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

1000 से अधिक साधु-संत शामिल
महंत कमल नयन दास ने बताया कि इस यात्रा में 1000 से अधिक साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हैं. डमरू, नगाड़ों और जय श्रीराम के गगनभेदी नारों से पूरी अयोध्या राममय हो उठी. चित्रकूट पहुंचने पर इस यात्रा का भव्य स्वागत और धार्मिक अनुष्ठान होंगे. यह आयोजन न केवल भक्ति और परंपरा का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता, त्याग और प्रेम का संदेश भी देता है.

मर्यादा, भक्ति और भाईचारे का अद्भुत प्रतीक
अयोध्या की भरत मिलाप यात्रा मर्यादा, भक्ति और भाईचारे का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है. इसका संबंध सीधे-सीधे त्रेता युग के उस प्रसंग से है जब भगवान श्रीराम वनवास के दौरान चित्रकूट में निवास कर रहे थे. तब भरत और शत्रुघ्न अयोध्या की प्रजा के साथ चित्रकूट पहुंचे थे, ताकि भगवान श्रीराम को वापस अयोध्या लाया जा सके. उस समय दोनों भाइयों का मिलन इतना भावनात्मक और पवित्र था कि धरती, आकाश और पर्वत तक भावविभोर हो उठे थे. इसी ऐतिहासिक प्रसंग की स्मृति में भरत मिलाप यात्रा का आयोजन हर वर्ष अयोध्या से चित्रकूट तक किया जाता है.

mritunjay baghel

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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कलयुग में भी त्रेता युग जीवंत! अयोध्या से भरत और शत्रुघ्न निकले चित्रकूट



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