Ballia News: धर्म नहीं, मानवता है इनकी पहचान! यूपी की ये संस्था लावारिस शवों को देती है अंतिम सम्मान
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Ballia Latest News: बलिया में देवाश्रम संस्था ने अपनी सेवा यात्रा शुरू कर दी है. यह संस्था लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती है. वहीं, प्रशासनिक अनुमति मिलने के बाद अब बलिया में मौजूद सभी शवों को भी हिंदू और मुस्लिम धर्म के अनुसार सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी जाएगी.
बलिया: समाज में संवेदनशीलता और सेवा की मिसाल पेश करते हुए, बलिया जिले में देवाश्रम संस्था ने अपनी सेवा यात्रा की शुरुआत कर दी है. यह संस्था उन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती है, जिनका कोई अपना नहीं होता और जो बेसहारा होते हैं. यह संस्था पूरी तरह जन सहयोग पर चलती है और किसी सरकारी सहायता या फंड पर निर्भर नहीं है.
संस्था की शुरुआत कैसे हुई?
देवाश्रम संस्था की शुरुआत साल 2012 में मऊ जनपद से हुई थी. मऊ में पोस्टमार्टम गृह में कार्यरत रहने के दौरान इस संस्था के संस्थापक ने अपने सामने 18 लावारिस शवों को बेसहारा पड़ा देखा. इस पीड़ा ने उन्हें यह मानवीय मिशन शुरू करने के लिए प्रेरित किया. अब तक संस्था ने मऊ जिले में करीब 650 लावारिस शवों को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर मुक्ति दिलाई है. संस्था के नाम की प्रेरणा मऊ के बाबा हरदेव सिंह जी से मिली. ‘देव’ शब्द वहीं से लिया गया और ‘आश्र्म’ जोड़कर संस्था का नाम देवाश्रम रखा गया.
संस्था पूरी तरह सामाजिक स्तर पर संचालित होती है और लोग स्वयं जुड़कर सहयोग देते हैं, ताकि किसी भी अनजान आत्मा को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी जा सके. बलिया में प्रशासनिक अनुमति मिलने के बाद संस्था ने अपना पहला लावारिस शव हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर मुक्ति दिलाई है. इस अवसर पर यूपी के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और बीजेपी जिलाध्यक्ष भी मौजूद रहे.
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धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार संस्कार
देवाश्रम संस्था न केवल हिंदू धर्म के बल्कि मुस्लिम समुदाय के लावारिस शवों का भी उनके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करवाती है. हिंदू शवों के लिए पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध यज्ञ किया जाता है, जबकि मुस्लिम शवों के लिए फातिहा पढ़ाई जाती है और कब्र में मिट्टी दी जाती है. यह सुनिश्चित करता है कि हर आत्मा को धर्मानुसार शांति मिल सके.
मऊ, गाजीपुर के बाद बलिया में सेवा शुरू
मऊ, देवरिया और गाजीपुर के बाद अब बलिया जिले में भी यह संस्था सक्रिय हो गई है. अब बलिया में हर लावारिस शव को वह सम्मान मिलेगा, जिसका कहीं न कहीं अभाव था. यह संस्था समाज में संवेदनशीलता और मानवीय सेवा की मिसाल पेश कर रही है, जिससे स्थानीय लोगों में भी समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बढ़ रही है.
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं… और पढ़ें