Banke Bihari Mandir: 1971 में चोरी, अब तक तोषखाना का ताला बंद…, आखिर कहां गया बिहारीजी का बेशकीमती खजाना?
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Banke Bihari Mandir Khazana: मथुरा के बांके बिहारी मंदिर के खजाने से जुड़ा रहस्य अब भी अनसुलझा है. वर्ष 1971 में मंदिर के तोषखाने से दो बार चोरी हुई थी, जिसमें सोने-चांदी के कीमती आभूषण और दस्तावेज गायब हो गए. अदालत के आदेश पर तब से खजाना सील है, जो आज तक नहीं खोला गया. आखिर बिहारीजी के खजाने का रहस्य क्या है?
मथुरा: भगवान बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Mandir) के खजाने में वर्ष 1971 में दो बार चोरी की घटनाएं हुईं. चोरी से पहले मंदिर के दोस्त खाने (तोषखाने) में कई बेशकीमती वस्तुएं रखी हुई थीं- जिनमें सोने की ठोस राधा रानी की मूर्ति, गाय-बछड़े की चार जोड़ी सोने की मूर्तियां और सोने के फ्लॉवर पॉट शामिल थे. जानकारों के अनुसार, इन सबके अलावा हीरे और सोने का मोर आकृति वाला हार तथा कई बहुमूल्य आभूषण भी रखे गए थे. बाद में इनमें से अधिकतर आभूषण चोरी होकर बिक गए.
मंदिर के सेवायत इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि वैष्णव परंपरा के अनुसार 1864 में निर्मित वर्तमान मंदिर के गर्भगृह में ठाकुरजी के सिंहासन के नीचे एक तोषखाना (खजाना कक्ष) बनाया गया था. इसमें रजत शेषनाग, स्वर्ण कलश में नवरत्न और सेवायतों को समर्पित श्रद्धांजलिपत्र जैसी ऐतिहासिक वस्तुएं सुरक्षित रखी गई थीं.
वर्ष 1971 में मंदिर समिति के अध्यक्ष प्यारेलाल गोयल के नेतृत्व में यह तोषखाना अंतिम बार खोला गया था. उस समय खजाने से कीमती गहने व आभूषण निकालकर उनकी सूची बनाई गई और पूरा सामान सील बंद बक्से में रखकर स्टेट बैंक, भूतेश्वर (मथुरा) में जमा कर दिया गया. समिति के सभी सातों सदस्यों को उस सूची की प्रतिलिपि दी गई थी. तब से लेकर अब तक उस बक्से को वापस नहीं लाया गया है.
इतिहासकारों के अनुसार, मंदिर के निर्माण काल में स्थापित इस खजाने में ठाकुरजी पर चढ़ाए गए कई हीरे-पन्ना जड़े आभूषण, सोने-चांदी के सिक्के और विभिन्न रियासतों (भरतपुर, करौली, ग्वालियर आदि) द्वारा प्रदत्त दान-पत्र व सेवा-पत्र रखे गए थे. ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1926 और 1936 में भी दो बार चोरी हुई थी. उन घटनाओं के बाद चार लोगों पर कार्रवाई की गई थी.
इसके बाद गोस्वामी समाज ने तहखाने का मुख्य द्वार बंद कर दिया और केवल एक छोटा-सा रास्ता (मोखा) बना दिया ताकि जरूरत पड़ने पर सामान रखा जा सके. 1971 में अदालत के आदेश से तोषखाने पर सील लगा दी गई, जो आज तक जस की तस है. बाद में, वर्ष 2002 और 2004 में मंदिर प्रशासन द्वारा तोषखाना खोलने के कानूनी प्रयास किए गए, लेकिन वे असफल रहे.
खजाने में थे ये अनमोल रत्न और दस्तावेज
स्थानीय नागरिक नवीन गौतम के अनुसार, तोषखाने में न केवल सोने-चांदी के आभूषण और हीरे-पन्ने थे, बल्कि मंदिर की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज़, दानपत्र, मोहर लगी सनदें, भूमि-पत्र, और स्मृति आलेख भी सुरक्षित रखे गए थे. इन दस्तावेज़ों को इस उद्देश्य से रखा गया था कि भविष्य में मंदिर के मालिकाना हक़ से जुड़ा कोई विवाद हो तो सेवायत उनके माध्यम से प्रमाण दे सकें.
नवीन गौतम का कहना है, ‘अब जबकि सरकारें प्रमाण मांग रही हैं, तो तहखाने में मौजूद ये सबूत सामने आने चाहिए. सवाल यह उठता है कि जब सोने-चांदी के आभूषण और दस्तावेज़ मंदिर के तोषखाने में रखे थे, तो आखिर वे गए कहां?’
मैं राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहा हूं. मुझे हिंदी मीडिया में 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. मैंने प्रिंट में रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल मीड…और पढ़ें
मैं राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहा हूं. मुझे हिंदी मीडिया में 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. मैंने प्रिंट में रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल मीड… और पढ़ें