Barsati Dacoit: भाई की हत्या ने बना दिया डाकू, गरीबों के लिए था रॉबिन हुड…, अमेठी का डाकू जिसने पुलिस को सालों तक छकाया, नाम सुन कांपते थे लोग
Barsati Daku Ki Story: यह कहानी है एक ऐसे शख्स की जो शुरू में मेहनत-मजदूरी करता था, लेकिन फिर उसके जीवन में कुछ ऐसा घटित हुआ कि वो साधारण इंसान से एक खूंखार डाकू बन गया. 80 के दशक में वो इतना फेमस हो गया कि यूपी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था और 15 सालों तक पुलिस उसे छू तक नहीं पाई थी. जी हां…इस खूंखार डाकू का नाम था बरसाती पासी उर्फ बरसाती डाकू. एक समय था जब बरसाती डाकू अमेठी-सुल्तानपुर समेत कई इलाकों में खौफ का पर्याय बन चुका था.
बरसाती पासी: साधारण परिवार से खौफनाक डाकू बनने तक का सफर
बरसाती पासी उर्फ बरसाती डाकू का जन्म अमेठी जिले के थोरा गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था. शुरू में वो मेहनत-मजदूरी करता था, लेकिन भाई की हत्या का बदला लेने के बाद वो एक खूंखार अपराधी बन गया. दरअसल, बरसाती डाकू के भाई की हत्या एक कार्यक्रम के दौरान कर दी गई थी. जिसकी शिकायत पुलिस से की, लेकिन उस वक्त पुलिस ने बरसाती को डांटकर थाने से भगा दिया था. इसके बाद बरसाती ने खुद अपने भाई की हत्या का बदला लेनी की ठान ली.
धीरे-धीरे बना लिया अपना बड़ा गैंग
बरसाती ने अपने तीन भाइयों रामचरन, बिर्जू, रघु के साथ मिलकर कर्मबली कश्यप की हत्या कर दी. इसके बाद पुलिस इन लोगों के पीछे पड़ गई और चारों भाई घर छोड़कर फरार हो गए. इस दौरान इन लोगों ने धीरे-धीरे अपना गैंग बड़ा कर लिया और डाकू बन गए. बरसाती के खौफ से आसपास के कई जिलों के लोग थर्राते थे. 70 के दशक में वो पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया था.
गरीबों की करता था मदद, बेटियों की करवाता था शादियां
बरसाती डाकू के नाम का खौफ इनता था कि उसका नाम सुनते ही लोग थर-थर कांपने लगते थे. अमेठी, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, जौनपुर, प्रयागराज और अयोध्या तक उसके आतंक की खबर थी. लोग बताते हैं कि वह गरीबों की मदद करता था, बेटियों की शादी करवाता था और जो दबंग लोग किसी को परेशान करते थे, उन्हें खत्म कर देता था. बरसाती डाकू के बारे में ऐसा बताया जाता है कि वो लोगों को बताकर लूटपाट करता था. वह पहले चिठ्ठी भेज देता था कि आज वो लूटने आ रहा है और लूट करके चला जाता था.
बरसाती एक पुजारी की तरह था
बरसाती के परिवार की सदस्य रानी देवी बताती हैं कि डाकू बनने की कहानी अनायास ही बन गई. लोगों ने उसे डाकू बना दिया. कई घटनाओं का नाम बरसाती और उसके परिवार के साथ जोड़ा जाता था, भले ही वह उनमें शामिल न हो. रानी देवी कहती हैं कि बरसाती एक पुजारी की तरह था, पूजा करता था, लेकिन पुलिस के हजारों जवान उसके पीछे लगते थे, पर उसे पकड़ नहीं पाते थे. रानी देवी की मानें तो उनके भाई की हत्या ने बरसाती को इतना परेशान कर दिया कि बदला लेने की आग में उसने डाकू बनने का रास्ता चुना.
पुलिस बरसाती को पकड़ने के लिए कई बार परिवार वालों को भी उठाती थी, जिससे परिवार के कई सदस्यों को जेल जाना पड़ा. अब परिवार के लोग शांति से रहते हैं. रानी देवी बताती हैं कि उनके चार बेटियां हैं, कोई बेटा नहीं. एक भाई पुलिस में है, एक कोटेदार है और बाकी दो परिवार संभाल रहे हैं.
गरीबों की मदद करता था बरसाती डाकू
थौरा गांव के राधेश्याम बताते हैं कि बरसाती गरीबों की मदद करता था. लेकिन भाई की मौत के बाद उसने डाकू बनने का रास्ता चुना. उनके परिवार को लेकर सवाल पर वह कहते हैं कि परिवार के लोग अब बहुत आराम से हैं और आजाद हैं. एक भाई पुलिस में है, दूसरा कोटेदार, एक भाई प्रधान रह चुका है और बाकी परिवार में जीवन यापन कर रहे हैं.