Barseem Farming : सर्दियों में बरसीम उगाने का ये तरीका सबसे धांसू, भीषण ठंड में भी मिलेंगी 8 कटिंग, पशुओं के लिए सुपरफूड

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Barseem Farming : सर्दियों में बरसीम उगाने का ये तरीका सबसे धांसू, भीषण ठंड में भी मिलेंगी 8 कटिंग, पशुओं के लिए सुपरफूड


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Barseem Farming in Winter : हरा चारा दूध उत्पादन का मुख्य आधार है. ये जितना अच्छा और ज्यादा होगा, पशु उतना ही दूध देंगे. सर्दियों में बरसीम पशुओं के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है. अगर सही तरीका अपनाया जाए तो किसान इसकी 6 से 8 बार बंपर कटिंग ले सकते हैं. इससे पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता बनी रहती है. सर्दियों में इसे खिलाने से न केवल पशु स्वस्थ रहते हैं बल्कि दूध उत्पादन बढ़ने से किसानों की आमदनी में भी भारी इजाफा होता है. बाजार में मिलने वाले महंगे फीड पर निर्भरता कम करने के लिए बरसीम हमेशा से सबसे अच्छा विकल्प रहा है.

शाहजहांपुर. पशुपालन के क्षेत्र में हरा चारा ‘सफेद क्रांति’ की रीढ़ माना जाता है. पोषक तत्वों से भरपूर हरा चारा न केवल पशुओं के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है, बल्कि दूध उत्पादन की लागत को भी कम करता है. सर्दियों के मौसम में बरसीम का हरा चारा पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक तरीके के बजाय वैज्ञानिक तकनीक अपनाएं, तो बरसीम की रिकॉर्ड तोड़ कटिंग ली जा सकती है. इसके लिए बुवाई से लेकर कटाई तक विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है. उन्नत बीजों का चयन, सही उर्वरक प्रबंधन और समय पर सिंचाई करके किसान चारे की किल्लत दूर कर अपनी आमदनी को दोगुना कर सकते हैं.

रामबाण क्यों

लोकल 18 से बात करते हुए शाहजहांपुर के प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह बताते हैं कि पशुओं के लिए बरसीम केवल चारा नहीं, बल्कि एक ‘सुपरफूड’ है. जब पशुओं को पर्याप्त मात्रा में बरसीम खिलाते हैं, तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और दूध की गुणवत्ता में सुधार आता है. बरसीम में प्रोटीन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है, जो पशुओं के पाचन तंत्र को सही रखता है. बाजार में मिलने वाले महंगे फीड पर निर्भरता कम करने के लिए बरसीम सबसे अच्छा विकल्प है. इसे खिलाने से पशु तंदुरुस्त रहते हैं.

किन बातों का ध्यान जरूरी

बरसीम से 6 से 8 कटिंग लेने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी है. सबसे महत्त्वपूर्ण है फास्फोरस का प्रयोग. बुवाई के समय सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल जड़ों को मजबूती देता है. पहली कटाई तब करें जब पौधों की लंबाई 10-12 इंच हो जाए. ऐसा करने से पौधों का बेस अच्छे से विकसित हो जाता है. प्रत्येक कटाई के बाद हल्की सिंचाई और यूरिया का छिड़काव करें जिससे ग्रोथ तेज हो जाती है. सर्दियों में पाले से बचाव के लिए खेत में हल्की नमी बनाए रखें. ध्यान रहे कि कटाई जमीन से 5-7 सेमी ऊपर से करें, ताकि कल्ले निकलने के लिए जगह बनी रहे.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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