DDU गोरखपुर यूनिवर्सिटी में शुरू होंगे फाइन आर्ट्स और म्यूज़िक के प्रोफेशनल क
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Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) सत्र 2026-27 से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स और बैचलर ऑफ म्यूज़िक आर्ट्स जैसे रेगुलर प्रोफेशनल कोर्स शुरू करने जा रहा है. इसके साथ ही पीजी में भी एमएफए और एमएमए की डिग्री मिलेगी.
गोरखपुर, कला और संगीत के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले पूर्वांचल के छात्रों के लिए बड़ी खबर है. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) सत्र 2026-27 से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) और बैचलर ऑफ म्यूज़िक आर्ट्स (BMA) जैसे रेगुलर प्रोफेशनल कोर्स शुरू करने जा रहा है. इसके साथ ही पीजी में भी एमएफए (Master of Fine Arts) और एमएमए (Master of Music Arts) की डिग्री मिलेगी.
अब तक विश्वविद्यालय में फाइन आर्ट्स सिर्फ बीए के एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता था, जबकि पोस्ट ग्रेजुएशन में केवल एमए की डिग्री दी जाती थी. इसकी वजह से छात्रों को प्रोफेशनल डिग्री की मान्यता नहीं मिलती थी और उन्हें लखनऊ, वाराणसी या प्रयागराज जैसे शहरों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ता था.
बोर्ड ऑफ स्टडीज़ कि शुरुआत
छात्रो के जिए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस दिशा में पहल की.कुलपति के निर्देश पर ललित कला और संगीत विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड ऑफ स्टडीज़ से पास कराया गया है. अब यह प्रस्ताव नवंबर में विद्या परिषद की बैठक में रखा जाएगा. वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे कार्य परिषद से पास कराकर राजभवन और शासन के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा.
छात्रों को होंगे ये फायदे
रेगुलर कोर्स के रूप में शुरू होने वाले इन प्रोग्राम्स की फीस सरकारी मानक के अनुसार तय होगी. आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्र भी इसमें प्रवेश ले सकेंगे. नए कोर्स के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी. इससे स्थानीय छात्रों को बाहर शहरों में पढ़ाई के लिए नहीं जाना पड़ेगा.
कोर्स की रूपरेखा और विषय
BFA में पेंटिंग, अप्लाइड आर्ट और स्कल्पचर आर्ट जैसे विषय होंगे, जबकि BMA में गायन, सितार-तबला और नृत्य कला शामिल होंगी. पीजी स्तर पर भी छह नए कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक में 20-20 छात्रों का एडमिशन लिया जाएगा. लगभग 25 साल बाद विश्वविद्यालय में कोई नया रेगुलर कोर्स शुरू होने जा रहा है. यदि शासन और राजभवन से मंजूरी मिल जाती है तो DDU के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ जाएगा. इससे पहले वर्ष 2000-01 में साइंस फैकल्टी के कुछ कोर्स रेगुलर मोड में शुरू किए गए थे. प्रस्ताव को परिषद से मंजूरी के बाद शासन को भेजा जाएगा ताकि अगले सत्र से इसका संचालन किया जा सके.