DGP को समन भेजने के लिए मजबूर… HC की फटकार, नहीं मिली टाइम पर चोट की रिपोर्ट

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DGP को समन भेजने के लिए मजबूर… HC की फटकार, नहीं मिली टाइम पर चोट की रिपोर्ट


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एसिड अटैक मामले में एफआईआर रद्द करने की याचिका को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चोट की रिपोर्ट देरी से मिलने पर पुलिस को फटकार लगाई है. साथ ही यह भी कहा है कि रिपोर्ट के लिए अलग-अलग बार-बार समन नहीं भेजा जा सकता है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार.

प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट में संपत्ति विवाद को लेकर किए गए सुनियोजित एसिड हमले से जुड़ी एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए  कोर्ट ने कहा कि जिस आपराधिक घटना में एसिड का इस्तेमाल हमले के हथियार के तौर पर किया जाता है, वह एक अलग ही श्रेणी के अपराध होते हैं. हाईकोर्ट ने मामले की गहन जांच की ज़रूरत को देखते हुए याचिका खारिज कर दी. जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई.

‘अलग-अलग नहीं भेज सकता समन’
हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस विभाग के प्रति अपनी गहरी नाराजगी भी जाहिर की. यह नाराजगी इस बात पर थी कि हाईकोर्ट द्वारा मामलों की सुनवाई शुरू करने से पहले, चोट की रिपोर्ट समय पर आगे नहीं भेजी गई. एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ़ चोट की रिपोर्ट समय पर मिल सके. यह सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग ज़िलों से इंस्पेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को बार-बार समन नहीं भेज सकता.

‘मुझे समन भेजने के लिए मजबूर होना पड़ेगा’
कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो उसे यूपी के पुलिस महानिदेशक या उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को समन भेजने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. कोर्ट अरुण शुक्ला की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में प्रयागराज ज़िले के करछना थाना में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें बीएनएस की धारा 352, 351(3) और 124(1) शामिल थी.

यह वारदात घिनौनी साजिश से जुड़ी हुई है
कोर्ट ने एफआईआर का बारीकी से अध्ययन किया और पाया कि आरोप ‘घिनौनी साज़िश’ से जुड़े है, जिसके तहत शिकायतकर्ता पर तेज़ाबी एसिड से हमला करने की योजना बनाई गई. अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि यह हमला पूरी तरह से संपत्ति विवाद के कारण ही सुनियोजित किया गया.

कोर्ट ने खारिज कर दी याचिका
एफआईआर के अनुसार, इस साज़िश में रोहित शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई थी. हालांकि, याचिकाकर्ता अरुण शुक्ला और एक अन्य आरोपी को उसके पीछे का सूत्रधार बताया गया. अपराध के हथियार के तौर पर तेज़ाबी एसिड के इस्तेमाल की अत्यधिक गंभीरता को देखते हुए बेंच ने फ़ैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता है. इसलिए बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर इसे खारिज कर दी.

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Prashant RaiChief Sub Editor

Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें





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