Dharohar: त्रेता युग से जुड़ा दुखहरण नाथ धाम, जहां दर्शन मात्र से दूर होते हैं सारे दुख

0
Dharohar: त्रेता युग से जुड़ा दुखहरण नाथ धाम, जहां दर्शन मात्र से दूर होते हैं सारे दुख


Last Updated:

Dukhharan Nath Mahadev Temple : गोंडा का दुखहरण नाथ महादेव मंदिर त्रेता युग से जुड़ा पौराणिक स्थल है. मान्यता है कि यहां भगवान भोलेनाथ ने विश्राम किया था और दर्शन मात्र से भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं. सावन और कजरी तीज के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का विशेष आस्था का जमावड़ा लगता है..

गोंडा : गोंडा जिले में स्थित दुखहरण नाथ महादेव मंदिर एक पौराणिक, ऐतिहासिक और अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है.मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ने यहां विश्राम किया था, इसी कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है.यहां आने वाले भक्तों का विश्वास है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से मन के कष्ट दूर होते हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है.

लोकल 18 से बातचीत में श्रद्धालु राघवेंद्र मोहन बताते हैं कि दुखहरण नाथ महादेव मंदिर का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक है.यहां की प्राकृतिक सुंदरता और भगवान शिव की दिव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं को बार-बार आने के लिए प्रेरित करती है.

मंदिर का पौराणिक इतिहास
दुखहरण नाथ महादेव मंदिर के महंत रुद्र नारायण गिरी बताते हैं कि इस मंदिर का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्म के अवसर पर भगवान भोलेनाथ कैलाश पर्वत से अयोध्या दर्शन करने गए थे.अयोध्या से लौटते समय भगवान शिव ने इसी स्थान पर विश्राम किया था. कथा के अनुसार, जब भगवान शिव यहां विश्राम कर रहे थे, तब अयोध्या में भगवान श्रीराम रो रहे थे.यह जानकर भगवान शिव पुनः अयोध्या पहुंचे और प्रभु श्रीराम को दर्शन दिए, जिसके बाद उनका रोना बंद हो गया.इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम ‘दुखहरण नाथ महादेव’ पड़ा, यानी वह स्थान जहां भगवान शिव ने दुखों का हरण किया.

नाम के पीछे की मान्यता
महंत रुद्र नारायण गिरी बताते हैं कि भगवान शिव के दर्शन से प्रभु श्रीराम के दुख दूर हुए, तभी से यह स्थल दुखहरण नाथ के नाम से प्रसिद्ध हो गया.श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान भोलेनाथ विराजमान हैं और भक्तों के सारे दुख-कष्ट हर लेते हैं. मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर त्रेता युग का है, इसलिए इसे गोंडा की प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल किया जाता है.वर्षों से यह मंदिर श्रद्धा, भक्ति और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

कब लगता है मेला ?
यहां हर सोमवार और शुक्रवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.सावन माह में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है.इसके अलावा कजरी तीज के अवसर पर सरयू नदी से जल लेकर लाखों कांवरिया दुखहरण नाथ महादेव मंदिर में जलाभिषेक करते हैं.मान्यता है कि इस दौरान की गई पूजा से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

homeuttar-pradesh

Dharohar: त्रेता युग से जुड़ा दुखहरण नाथ धाम, जहां दर्शन मात्र से दूर…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हो सकता है आप चूक गए हों