Farming Tips: गेहूं की फसल से चाहिए तगड़ी कमाई, तो ये 3 किस्म है सबसे बेस्ट, कम पानी में देती है डबल पैदावार

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Farming Tips: गेहूं की फसल से चाहिए तगड़ी कमाई, तो ये 3 किस्म है सबसे बेस्ट, कम पानी में देती है डबल पैदावार


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Genhu Ki Buwai Tips: नवंबर शुरू होते ही किसानों को गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट जाना चाहिए. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि समय पर और सही विधि से बुवाई करने पर फसल की पैदावार कई गुना बढ़ जाती है. इस खबर में जानिए किस विधि को अपनाने से बीज की लागत कम और उत्पादन ज्यादा होता है.

फिरोजाबाद: जैसे ही नवंबर का महीना शुरू होता है, वैसे ही किसानों के लिए गेहूं की बुवाई का सही समय आ जाता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जो किसान सही समय और सही विधि से गेहूं की बुवाई करते हैं, उन्हें हर साल अधिक पैदावार मिलती है. लेकिन अक्सर कई किसान जल्दबाजी या गलत विधि से बुवाई कर देते हैं, जिससे उनकी फसल पर असर पड़ता है और उत्पादन कम हो जाता है.

कृषि विज्ञान केंद्र फिरोजाबाद के वैज्ञानिक डॉ. ओमकार सिंह बताते हैं कि वर्तमान समय में किसान धान और तोहिया की कटाई में लगे हुए हैं. जैसे ही यह काम पूरा हो, तुरंत खेतों को गेहूं की बुवाई के लिए तैयार कर लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि अच्छे और प्रमाणित बीज का चयन करना सबसे पहला कदम है जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होती हैं.

गेहूं की इन प्रजातियों की करें बुवाई
डॉ. सिंह ने बताया कि किसानों को इस सीजन में डिबीडब्लू 303, डिबीडब्लू 187 और डिबीडब्लू 222 जैसी उन्नत प्रजातियों की बुवाई करनी चाहिए. इसके अलावा कानपुर चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई नई प्रजाति के-1317 कम पानी वाले इलाकों के लिए बेहद उपयुक्त है. इस किस्म को बहुत ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती. केवल एक या दो बार पानी देने से ही गेहूं की फसल अच्छे से तैयार हो जाती है.

पंक्तिवार विधि अपनाने से होगी अधिक पैदावार
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गेहूं की बुवाई पंक्तिवार (लाइन में) की जानी चाहिए. ऐसा करने से बीज की मात्रा कम लगती है, फसल को हवा और बारिश से कम नुकसान होता है और उत्पादन भी अधिक होता है. वहीं अगर किसान बिना पंक्ति के बुवाई करते हैं, तो उन्हें ज्यादा बीज का इस्तेमाल करना पड़ता है और फसल गिरने की संभावना भी बढ़ जाती है.

डॉ. सिंह ने बताया कि पंक्तिवार बुवाई विधि अपनाने से किसान लागत कम कर सकते हैं और मिट्टी की नमी को भी लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं. खासकर उन इलाकों में जहां पानी की कमी रहती है, वहां किसान कम सिंचाई वाली किस्में चुनें ताकि उत्पादन प्रभावित न हो.

समय पर बुवाई से बढ़ेगी आमदनी
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर किसान नवंबर की शुरुआत में ही गेहूं की बुवाई कर दें, तो यह फसल समय पर पकती है और कटाई भी जल्दी हो जाती है. इससे खेत अगले मौसम की खेती के लिए भी समय पर तैयार किए जा सकते हैं. देर से बुवाई करने पर न केवल पैदावार घटती है बल्कि फसल पर रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है.

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं… और पढ़ें

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गेहूं की फसल से चाहिए तगड़ी पैदावार, तो ये 3 किस्म है सबसे बेस्ट



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