Farrukhabad News : इस बाजार में खरीदारी से धनतेरस हो जाएगा शुभ, कम दाम में 1 नंबर के बर्तन, इनका काम 150 साल पुराना

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Farrukhabad News : इस बाजार में खरीदारी से धनतेरस हो जाएगा शुभ, कम दाम में 1 नंबर के बर्तन, इनका काम 150 साल पुराना


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Dhanteras Market Farrukhabad : इस धनतेरस पर नए सामानों की खरीदारी के लिए फर्रुखाबाद का यह बाजार बेस्ट है. यहां पर आपको बेहद कम दामों में कई तरह के नक्काशीदार आकर्षक डिजाइन वाले बर्तन मिल जाएंगे. आइये लोकेशन जानते हैं.

फर्रुखाबाद. आज धनतेरस है. अगर आप भी इस धनतेरस पर सुख-समृद्धि के लिए नए सामानों की खरीदारी करना चाहते हैं तो आपके लिए फर्रुखाबाद का यह बाजार खास है. यहां पर आपको कई तरह के नक्काशीदार आकर्षक डिजाइन वाले बर्तन मिल जाएंगे, वह भी बेहद कम दामों में. यह बाजार फर्रुखाबाद के कमालगंज में है. लोकल 18 से बात करते हुए यहां की ओम से बर्तन भंडार के दुकान संचालक राकेश गुप्ता बताते हैं कि हर साल की तरह ही इस बार भी धनतेरस की पर्व को लेकर उन्होंने विशेष तैयारी की है. खाटू श्याम बर्तन भंडार पर पीतल स्टील के साथ ही दूसरी धातुओं के भी बर्तन मिल जाएंगे. रेट कम और क्वालिटी अच्छी होने के कारण यहां पर भीड़ हमेशा रहती है. कस्बा कमालगंज सब्जी मंडी के निकट इस दुकान पर आपको थाली का सेट, शीतलक, लोटा, कलस, कढ़ाई, तबा, चम्मच, ग्लास, परात, कुकर, टिफिन, लॉन्च बॉक्स, गिफ्ट पैक और स्टील का सारा सामान बेहद कम रेट पर मिलेगा.

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ये बर्तन मशहूर

बर्तन और परात कारीगरों के मुताबिक, करीब 150 साल पहले शहर की साख पीतल इंडस्ट्री से थी. यहां की बनी सालन पकाने की पीतल की डेगों का सऊदी अरब में निर्यात होता था. नेपाल भी तांबा, पीतल के बर्तनों का कद्रदान था. यहां की बनी परात एटा, शाहजहांपुर, इटावा, मैनपुरी जिलों के साथ ही कानपुर, आगरा और पीलीभीत आदि जिलों में भिजवाई जाती है. जिले में पीतल का करीब 40 करोड़ रुपये सालाना टर्न ओवर है. फर्रुखाबाद में भी पीतल के कारखाने हैं, जहां शहर में भाउटोला, बजरिया, गढ़ी नवाब न्यामत खा, हाता सफदर खां व बढ़पुर आदि मोहल्लों में पीतल की परात बनती है. कारीगर बताते हैं कि अक्टूबर से मार्च तक ही पीतल की परात का काम चलता है.

तीन कारीगर

कारीगर रोजाना 300 से 400 रुपये का काम कर लेते हैं. तीन से 10 किलो की परात बनती है. कच्चा माल हाथरस, अलीगढ़, दिल्ली और कानपुर से आता है. जिले में करीब 40 बड़े कारोबारी हैं. दुकानदार राकेश गुप्ता बताते हैं कि बर्तन बनाने में तीन कारीगर लगते हैं. पहले चादर की कठिलाई होती है, फिर बनवाई और नक्काशी. इसके बाद छिलाई का काम होता है. यह तीनों काम अलग-अलग कारीगर करते हैं. बिना इन तीनों कारीगरों के बर्तन नहीं बन सकते हैं.

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें

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इस बाजार में खरीदारी से धनतेरस हो जाएगा शुभ, कम दाम में 1 नंबर के बर्तन



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