Firozabad Ground Report: धूल, गंदगी और टूटी सड़कें… स्मार्ट सिटी के नाम पर दिखावा! नहीं बदली फिरोजाबाद की तस्वीर

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Firozabad Ground Report: धूल, गंदगी और टूटी सड़कें… स्मार्ट सिटी के नाम पर दिखावा! नहीं बदली फिरोजाबाद की तस्वीर


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Ground Report of Firozabad: फिरोजाबाद के वार्डों की स्थिति बताती है कि स्मार्ट सिटी का टैग सिर्फ नाम का रह गया है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की तस्वीर नहीं बदली. गलियां गंदगी से भरी हैं, नालियां जाम हैं और सड़कों पर धूल उड़ रही है.

फिरोजाबाद. यूपी के फिरोजाबाद को नगर निगम और स्मार्ट सिटी का दर्जा मिले कई साल हो चुके हैं. करोड़ों रुपये का बजट विकास कार्यों के नाम पर खर्च भी हुआ है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है. शहर के वार्डों में गंदगी, टूटी सड़कों और जाम की समस्या ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. महानगर बनने का सपना दिखाने वाले अधिकारियों की नाकामी अब जनता के सब्र को तोड़ रही है.

वार्डों में गंदगी का अंबार, शिकायतों पर नहीं सुनवाई
लोकल 18 की टीम ने जब वार्ड नंबर एक का दौरा किया तो गलियों और सड़कों पर गंदगी के ढेर और टूटी नालियां हर ओर नजर आईं. स्थानीय निवासी राधेश्याम ने बताया कि यहां की गलियों में पानी और कचरे का जमाव रहता है. रास्तों पर लोग बालू डालकर चलना बंद कर देते हैं. आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है. वहीं, निवासी चौधरी ने कहा कि यहां से गुजरने वाली सड़कों पर गिट्टी और बालू की गाड़ियां खड़ी रहती हैं. इससे सुबह बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है और जाम की स्थिति बन जाती है.

करोड़ों का बजट, लेकिन विकास का नामोनिशान नहीं
वार्ड निवासी राज किशोर ने बताया कि हमारे वार्ड के सामने एक सड़क के विकास के लिए करीब 40 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ था, लेकिन उसका असर आज तक दिखाई नहीं दिया. सड़क किनारे धूल, मिट्टी और गंदगी हमेशा बनी रहती है. नगर निगम ने सिर्फ कागज़ों में विकास दिखाया है. भुवनेश्वर चंद्र ने कहा कि नगर निगम स्मार्ट सिटी का सपना दिखा रहा है, लेकिन नालों और गलियों की हालत देखकर हकीकत समझी जा सकती है. कई जगहों पर नालियां गंदगी से पूरी तरह चौक हैं, जिससे पानी बहने के बजाय सड़कों पर फैल जाता है.

सड़कें टूटी, उड़ती धूल और बढ़ते हादसे
वार्ड के कई हिस्सों में सड़कों की हालत बेहद खराब है. जगह-जगह गड्ढे और उड़ती धूल लोगों के लिए परेशानी बन गई हैं. स्कूल जाने वाले बच्चे, दोपहिया चालक और बुजुर्ग रोज हादसे के खतरे से गुजरते हैं. लाखन सिंह का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी दफ्तर में बैठकर योजनाएं बनाते हैं, लेकिन वार्डों की स्थिति जानने कभी नहीं आते. लोगों ने कई बार शिकायत की, मगर कोई सुनवाई नहीं होती.

स्मार्ट सिटी का सपना, हकीकत में गंदा शहर
फिरोजाबाद को जब स्मार्ट सिटी में शामिल किया गया, तो लोगों को उम्मीद थी कि शहर का कायाकल्प होगा. लेकिन आज स्थिति यह है कि वार्डों की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक गंदगी, धूल और अराजकता फैली है. स्थानीय लोग कहते हैं कि अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने शहर की सूरत बिगाड़ दी है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सफाई व्यवस्था बदहाल है. जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर स्मार्ट सिटी का पैसा कहां गया और शहर कब साफ होगा.
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धूल, गंदगी और टूटी सड़कें… करोड़ों खर्च, पर नहीं बदली फिरोजाबाद की तस्वीर



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