Gardening Tips : बदलते मौसम में ये 3 रोग गेंदा फूलों के लिए घातक, सिंचाई से लेकर कीटनाशकों तक, जानें बचाव की सबसे सॉलिड ट्रिक

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Gardening Tips : बदलते मौसम में ये 3 रोग गेंदा फूलों के लिए घातक, सिंचाई से लेकर कीटनाशकों तक, जानें बचाव की सबसे सॉलिड ट्रिक


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Marigold cultivation : मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर फूलों की खेती पर भी साफ दिखने लगा है. गेंदा किसानों के लिए ये बदलाव ज्यादा घातक है. अगर अचानक पाले या अधिक ठंड की आशंका हो, तो गेंदा की फसल को पुआल या प्लास्टिक शीट से ढककर सुरक्षित किया जा सकता है. सही समय पर उचित सावधानियां अपनाकर किसान अपनी फसल को मौसम के दुष्प्रभाव से बचा सकते हैं. लोकल 18 ने इस बारे में रायबरेली जिले के वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह से बात की.

मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब फूलों की खेती पर भी साफ नजर आने लगा है. खासकर गेंदा की फसल बदलते तापमान, अचानक ठंड-गर्मी, कोहरा और नमी के कारण प्रभावित हो सकती है. गेंदा एक ऐसी फसल है, जिसकी मांग बाजार में सालभर बनी रहती है, लेकिन मौसम की मार से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है. ऐसे में किसानों को पहले से सतर्क रहना बेहद जरूरी है.

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रायबरेली जिले के वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह (बीएससी एग्रीकल्चर इलाहाबाद विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बताते हैं कि गेंदा की फसल के लिए 18 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है. जब तापमान अचानक गिर जाता है या अधिक बढ़ जाता है, तो पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फूलों की संख्या कम हो जाती है.

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अत्याधिक ठंड और कोहरे के कारण पत्तियों पर फफूंदजनित रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है. अधिक नमी की स्थिति में जड़ सड़न की समस्या भी देखने को मिलती है.

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बदलते मौसम में सबसे पहले खेत की जल निकासी पर ध्यान देना चाहिए. खेत में पानी जमा होने से गेंदे की जड़ें खराब हो सकती हैं. इसलिए जरूरत के अनुसार ही सिंचाई करें और हल्की सिंचाई को प्राथमिकता दें. सुबह के समय सिंचाई करना अधिक फायदेमंद रहता है, ताकि पौधों को पर्याप्त नमी मिल सके.

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रोग और कीट नियंत्रण भी इस मौसम में बेहद जरूरी है. अधिक नमी होने पर पाउडरी मिल्ड्यू, लीफ स्पॉट और झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ सकता है. इसके लिए समय-समय पर फसल की निगरानी करें और लक्षण दिखते ही उद्यान विशेषज्ञ की सलाह से फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करें. कीटों से बचाव के लिए पीले चिपचिपे ट्रैप का इस्तेमाल भी कारगर साबित होता है.

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संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरक देने से पौधे मजबूत रहते हैं. पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग फूलों की गुणवत्ता और संख्या बढ़ाने में सहायक होता है. मल्चिंग करने से मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है और नमी भी बनी रहती है.

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यदि अचानक पाले या अधिक ठंड की आशंका हो, तो गेंदा की फसल को पुआल या प्लास्टिक शीट से ढककर सुरक्षित किया जा सकता है. सही समय पर उचित सावधानियां अपनाकर किसान गेंदा की फसल को मौसम के दुष्प्रभाव से बचा सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.

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बदलते मौसम में ये रोग गेंदा फूलों के लिए घातक, जानें बचाव की सबसे सॉलिड ट्रिक



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