Gardening Tips: गमले के लिए ऐसे तैयार करें मिट्टी, फल-फूलों से भर जाएगा आपका गमला
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Gardening Tips in Hindi: क्या आपके गमले के पौधे भी कुछ समय बाद सूख जाते हैं या उनकी ग्रोथ रुक जाती है? अक्सर हम नर्सरी से सुंदर पौधा तो ले आते हैं, लेकिन उसे सामान्य मिट्टी में लगाकर बड़ी गलती कर बैठते हैं. पौधों की लंबी उम्र और भरपूर फल-फूल के लिए सबसे जरूरी है ‘पॉटिंग मिक्स’ यानी गमले की मिट्टी का सही मिक्स. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बगीचे की साधारण मिट्टी गमले के बंद माहौल में सख्त हो जाती है, जिससे जड़ें सांस नहीं ले पातीं. इस खबर में जानिए कोकोपीट, वर्मीकंपोस्ट और रेत का सही अनुपात, जो आपके घर के बगीचे को एकदम हरा-भरा बना देगा.
अक्सर लोग नर्सरी से सुंदर पौधा तो ले आते हैं, लेकिन उसे सामान्य मिट्टी में लगा देते हैं जिससे कुछ ही दिनों में पौधा सूखने लगता है. गमले में लगे पौधे के पास फैलने के लिए सीमित जगह होती है, इसलिए उसे ऐसी मिट्टी की जरूरत होती है जो उपजाऊ होने के साथ-साथ हल्की भी हो. अगर मिट्टी सही तरीके से तैयार की जाए, तो पौधों को जरूरी पोषण मिलता है, जड़ें तेजी से फैलती हैं और फल-फूल भी ज्यादा आते हैं. आइए जानते हैं वह सही तरीका जिससे आप घर पर ही प्रोफेशनल लेवल की ‘पॉटिंग मिक्स’ तैयार कर सकते हैं.

पौधा लगाने से पहले गमले की सही तैयारी करना बेहद जरूरी है. अगर गमले के नीचे छेद नहीं होंगे या वे बंद होंगे, तो पानी जमा रहेगा जिससे जड़ें सड़ सकती हैं. गमले के तल में सबसे पहले छोटे पत्थर, ईंट के टुकड़े या बजरी डाल दें. इसके ऊपर सूखी पत्तियों की एक पतली परत भी बिछाई जा सकती है. यह छोटी सी तैयारी पानी को आसानी से बाहर निकलने का रास्ता देती है और जड़ों को ऑक्सीजन (हवा) मिलती रहती है, जो पौधे की लंबी उम्र तय करती है.

खेत की मिट्टी अक्सर भारी और चिपचिपी होती है. जब इसे सीधे गमले में डाला जाता है, तो यह सूखने पर पत्थर जैसी सख्त हो जाती है, जिससे पानी नीचे नहीं जा पाता और पौधों की ग्रोथ रुक जाती है. इसलिए मिट्टी का इस्तेमाल करने से पहले उसे 2-3 दिन तेज धूप में सुखाएं ताकि हानिकारक कीटाणु मर जाएं. इसके बाद मिट्टी की गुठलियां तोड़ें और उसे छान लें. गमलों के लिए हमेशा हल्की और भुरभुरी मिट्टी ही सबसे सही रहती है.
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पौधों को तेजी से बढ़ने के लिए अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाना बहुत जरूरी है. एक बात का विशेष ध्यान रखें कि कभी भी ताजी गोबर की खाद न डालें, क्योंकि इसकी गर्मी से पौधे जल सकते हैं. कम से कम एक साल पुरानी और काली पड़ चुकी गोबर की खाद ही सबसे बढ़िया रहती है. अगर आप सुरक्षित विकल्प चाहते हैं, तो वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) का इस्तेमाल करें, जो पौधों की जड़ों को बिना नुकसान पहुंचाए भरपूर पोषण देती है.

कोकोपीट (नारियल के रेशों का चूरा) मिट्टी को हल्का और मुलायम बनाने का काम करता है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अपने वजन से कई गुना ज्यादा नमी को सोख लेता है, जिससे पौधों को बार-बार पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती. इस्तेमाल से पहले कोकोपीट की ईंट को पानी में भिगो दें ताकि वह फूलकर नरम हो जाए. इससे मिट्टी में नमी का सही संतुलन बना रहता है और पौधों की नाजुक जड़ें मिट्टी के अंदर आराम से फैल पाती हैं.

मिट्टी के मिश्रण में थोड़ी नदी की बालू या मोटी रेत मिलाने से पानी की निकासी बहुत बेहतर हो जाती है. अगर गमले में पानी ज्यादा देर तक रुकेगा, तो जड़ें गलने लगेंगी और पौधा मर जाएगा. रेत मिट्टी को ढीला रखती है, जिससे जड़ों को सांस लेने में मदद मिलती है. खासतौर पर टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जियों वाले गमलों में रेत मिलाना बहुत फायदेमंद रहता है क्योंकि इन्हें जड़ों के पास खड़ा पानी बिल्कुल पसंद नहीं होता.

अच्छे नतीजे पाने के लिए सभी चीजों का सही मात्रा में होना बहुत जरूरी है. एक अच्छे मिश्रण के लिए 4 हिस्सा बगीचे की मिट्टी, 3 हिस्सा खाद (गोबर या वर्मीकंपोस्ट), 2 हिस्सा कोकोपीट और 1 हिस्सा रेत मिलाएं. अगर आप चाहें तो इसमें मुट्ठी भर नीम की खली भी मिला सकते हैं ताकि मिट्टी में कीड़े न लगें. यही सटीक संतुलन पौधों की तेज बढ़त और बेहतर उत्पादन के लिए सबसे सही माना जाता है.

सभी चीजों को केवल ऊपर-ऊपर से डालना काफी नहीं है, उन्हें बराबर मिलाना बहुत जरूरी है वरना मिट्टी कहीं सख्त तो कहीं बहुत ज्यादा नरम रह जाएगी. सभी सामग्रियों को जमीन पर चादर बिछाकर या किसी बड़े टब में डालें. फावड़े या हाथ से इन्हें तब तक मिलाएं जब तक सब कुछ एक जैसा न दिखने लगे. ऊपर से थोड़ा पानी छिड़ककर मिट्टी को हल्का नम करें, लेकिन उसे कीचड़ जैसा गीला बिल्कुल न करें. अगर मिट्टी मुट्ठी में दबाने पर ढेले जैसी बने और छूते ही तुरंत टूट जाए, तो समझिए आपका मिश्रण तैयार है.

मिश्रण तैयार करने के तुरंत बाद पौधा लगाने के बजाय, इसे 2-3 दिन के लिए किसी छायादार जगह पर छोड़ दें. इससे मिट्टी के अंदर मौजूद सूक्ष्म जीव और खाद अच्छे से सेट हो जाते हैं और मिट्टी की उर्वरता बढ़ जाती है. इसके बाद आप इसे गमलों में भरकर अपनी पसंद के पौधे लगा सकते हैं. इस तरीके से तैयार की गई मिट्टी में पौधे न सिर्फ तेजी से बढ़ते हैं, बल्कि उनमें बीमारियां कम लगती हैं और फूल-सब्जियां भी भरपूर मात्रा में मिलती हैं.