Ground Report : चित्रकूट में कफन ओढ़कर क्यों बैठे ये लोग, खून से लिख चुके 50 से अधिक खत, इनकी मांग से हर कोई सहमत
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Ground Report Chitrakoot Hunger Strike : चित्रकूट में इन दिनों एक अलग तरह का प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. जिले के कई युवा और व्यापारी तीन दिन से कफन ओढ़कर आमरण अनशन पर बैठे हैं. चित्रकूट में मेडिकल कॉलेज की मांग बहुत पुरानी है, जो समय-समय पर उठती रही है. अनशनकारियों का कहना है कि अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है. जिला अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों को तुरंत प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है. तुरंत इलाज न मिलने पर अक्सर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं. जब तक मांग पूरी नहीं होगी, प्रोटेस्ट नहीं थमेगा. लोकल 18 प्रदर्शन करने वालों के बीच पहुंचा.
चित्रकूट. धर्मनगरी चित्रकूट इन दिनों एक अलग तरह के जनआंदोलन की गवाह बनी हुई है. स्वास्थ्य सेवाओं को वेंटिलेटर से उठाने की मांग को लेकर जिले के युवा और व्यापारी पिछले तीन दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं. खास बात यह है कि यह विरोध सामान्य अनशन जैसा नहीं है, बल्कि सफेद कफन ओढ़कर भूखे-प्यासे बैठकर किया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों कहना है कि यह कफन प्रतीक है उस बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का, जिसमें मरीजों की जान हर दिन जोखिम में पड़ रही है. शहर के शहीद स्मारक प्रमुख में चल रहे सत्याग्रह में युवाओं के साथ व्यापार मंडल से जुड़े लोग भी शामिल हैं.
बच जाएगी जान
लोकल 18 से बात करते हुए अनशन पर बैठे व्यापारी विनोद केसरवानी और युवा भूपेंद्र पटेल बताते हैं कि यह सत्याग्रह का तीसरा दिन है. चित्रकूट में वर्षों से मेडिकल कॉलेज की मांग उठती रही है, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन मिले हैं. जिला अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों को तुरंत प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है. अब तक 50 से अधिक लोगों ने अपने खून से सरकार को पत्र लिखा है, जिसमें चित्रकूट में शीघ्र मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग की गई है. भूपेंद्र पटेल का कहना है कि जिले की स्वास्थ्य सेवाएं इस कदर कमजोर हैं कि गंभीर मरीजों को तत्काल प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है. कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं. अगर समय पर यहां बेहतर इलाज मिल जाए तो कई जिंदगियां बच सकती हैं.
प्राणों की आहुति
भूपेंद्र का कहना है कि जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक सुविधाओं की भारी कमी है. इससे आमजन को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है. जब तक मेडिकल कॉलेज की औपचारिक घोषणा नहीं होती तब तक यह अभियान जारी रहेगा. जरूरत पड़ी तो हम अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटेंगे. अनशन पर बैठे लोगों का कहना कहना ही कि जब तक कोई सक्षम अधिकारी मौके पर आकर ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक यह अनशन समाप्त नहीं होगा.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें