Ground Report: नोएडा में नगर निगम की मांग तेज, यूपी कैबिनेट में प्रस्ताव के बाद जनता ने उठाए बड़े सवाल!
नोएडा. नगर निगम गठन की मांग एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है, बीते साल सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोएडा प्राधिकरण को नगर निगम बनाने पर विचार और परामर्श करने के निर्देश देने के बाद अब यूपी कैबिनेट की गुरुवार को हुई बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव रखे जाने से बहस तेज हो गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में आम जनता की कोई सीधी भागीदारी नहीं है और सारे फैसले कुछ अधिकारियों द्वारा दफ्तरों में बैठकर किए जाते हैं, जिससे जमीनी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं.
150 वाली घटना रोकी जा सकती थी
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि नगर निगम बनने से जवाबदेही तय होगी और पार्षदों के जरिए जनता सीधे अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकेगी. अभी हालात यह हैं कि नोएडा प्राधिकरण में बैठे शीर्ष अधिकारियों तक आम आदमी की पहुंच लगभग नामुमकिन है. बीते दिनों सेक्टर-150 में हुई घटना को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए और कहा कि अगर नगर निगम जैसी व्यवस्था होती तो शायद लापरवाही रोकी जा सकती थी और हालात संभाले जा सकते थे.
नगर निगम बनने से एसेट्स बढ़ेंगे और समस्याएं खत्म होंगी
नोएडा निवासी और डीडीआरडब्ल्यू के अध्यक्ष एनपी सिंह ने कहा कि नगर निगम बनने से जिले में एसेट्स बढ़ेंगे और जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी. जिला प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण और नगर निगम तीनों अपने-अपने दायरे में काम करेंगे, जिससे समस्याओं का समाधान संभव होगा. उन्होंने कहा कि नोएडा एक संवेदनशील और तेजी से बढ़ता शहर है, जहां गांव बेहद कंजेस्टेड हैं. आग या किसी आपदा की स्थिति में राहत कार्य तक संभव नहीं हो पाता, ऐसे में संसाधनों और सिस्टम को मजबूत करना बेहद जरूरी है.
नगर निगम से जनता की होगी सीधी पहुंच
एनपी सिंह ने यह भी कहा कि नगर निगम बनने से नुकसान क्या है? निगम की टीम आएगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, सफाई व्यवस्था सुधरेगी और जो काम वर्षों से अटके हैं, वे समय पर पूरे हो सकेंगे. प्राधिकरण अपना विकास कार्य करेगा, नगर निगम नागरिक सुविधाओं का ध्यान रखेगा और पुलिस प्रशासन कानून-व्यवस्था संभालेगा. जिम्मेदारियों के बंटवारे से अव्यवस्था नहीं बल्कि समाधान निकलेगा.
नोएडा प्राधिकरण पर गंभीर आरोप
वहीं सेक्टर-71 निवासी गिरीश मिश्रा ने नोएडा प्राधिकरण पर गंभीर आरोप लगाए, उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह सोचना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट को प्राधिकरण को ऐसी सलाह क्यों देनी पड़ी. प्राधिकरण में भ्रष्टाचार चरम पर है और बिना रिश्वत कोई काम नहीं होता. उन्होंने धारा-10 को ‘ब्रह्मास्त्र’ बताते हुए कहा कि इसी के सहारे डराकर पैसा वसूला जाता है, नगर निगम बनने से जनता सीधे देख पाएगी कि कौन सा काम हो रहा है और कौन सा नहीं.
नोएडा के गांवों का है बुरा हाल
गांव होशियारपुर के निवासी नरेश यादव और सेक्टर-66 के केके मिश्रा ने गांवों की बदहाल स्थिति को उजागर किया. उन्होंने बताया कि सीवर ओवरफ्लो, नालियों में गंदगी, कई दिनों तक सड़ता कूड़ा और गंदे पानी की सप्लाई आम बात हो चुकी है. अधिकारी सुनने को तैयार नहीं होते और मूलभूत सुविधाओं के बिना लोगों को जीवन गुजारना पड़ रहा है. उनका कहना है कि नगर निगम बनने से शिकायतों का निस्तारण आसान होगा.
केंद्र और प्रदेश योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचता
एनपी सिंह ने यह भी कहा कि नोएडा से करोड़ों रुपये टैक्स के रूप में सरकार को जाते हैं, लेकिन केंद्र या प्रदेश सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ नोएडा को नहीं मिलता. यहां एक स्वायत्त बॉडी ही पैसा इकट्ठा करती है और वही खर्च करती है, जबकि रेवेन्यू दूसरे क्षेत्रों में चला जाता है. नगर निगम बनने से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं सीधे नोएडा तक पहुंचेंगी, प्राधिकरण की मोनोपॉली खत्म होगी और पारदर्शिता के साथ विकास कार्य आगे बढ़ सकेंगे.