Heritage: राजनीति से फिल्मी दुनिया तक, सभी ने झुकााया सिर अमेठी के कालिकन धाम में, जानें मंदिर का रहस्‍य

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Heritage: राजनीति से फिल्मी दुनिया तक, सभी ने झुकााया सिर अमेठी के कालिकन धाम में, जानें मंदिर का रहस्‍य


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Amethi Latest News: अमेठी का मां कालिका धाम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की गहराई को दर्शाने वाली प्राचीन धरोहर भी है. यहां के अमृत कुंड का जल, मंदिर की पौराणिक कथा और मां कालिका की स्वयंभू प्रतिमा भक्तों के हृदय में अलौकिक आस्था का संचार करती है.

अमेठी. यूूपी में अमेठी जनपद के संग्रामपुर विकासखंड स्थित भौसिंहपुर गांव में विराजमान मां कालिका धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह एक प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर भी है. इस मंदिर का इतिहास अयोध्या की राजकुमारी सुकन्या और महर्षि च्यवन मुनि से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि मंदिर परिसर में स्थित अमृत कुंड के जल का स्पर्श मात्र से भक्तों के दुख-कष्ट दूर हो जाते हैं. यही कारण है कि यह स्थल आज भी हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है.

अमृत कुंड पर विराजमान है मां कालिका धाम
अमेठी के भौसिंहपुर गांव में स्थित सिद्धपीठ मां कालिका धाम की महिमा प्राचीन काल से प्रसिद्ध है. यह मंदिर अमृत कुंड के समीप स्थित है, जहां का जल चमत्कारी माना जाता है. मान्यता है कि इस कुंड के शीतल जल का स्पर्श मात्र ही सभी प्रकार के दुखों और कष्टों को समाप्त कर देता है. देवी पुराण, कालिका पुराण और श्रीमद्भागवत महापुराण जैसे ग्रंथों में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है. भक्त अपनी-अपनी मान्यता के अनुसार यहां माता से मनोकामनाएं मांगते हैं. कोई टिकरी चढ़ाता है तो कोई घंटे बांधकर अपनी आस्था व्यक्त करता है. श्रद्धालुओं की भीड़ वर्षभर यहां बनी रहती है.

अयोध्या की राजकुमारी सुकन्या से जुड़ा है इतिहास
मां कालिका धाम का इतिहास अयोध्या की राजकुमारी सुकन्या और महर्षि च्यवन मुनि से जुड़ा हुआ बताया जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार सुकन्या ने महर्षि च्यवन मुनि के आश्रम के पास खेलते हुए अनजाने में उनके शरीर में दीमक द्वारा बने छिद्रों को साफ किया, जिससे उनकी आंखें घायल हो गईं. अपनी गलती का अहसास होने पर सुकन्या ने महर्षि की सेवा में स्वयं को समर्पित कर दिया. देवताओं के वैद्य अश्विन कुमारों ने महर्षि की आंखें ठीक करने का प्रयास किया. कहा जाता है कि महर्षि ने इस अमृत कुंड में स्नान कर फिर से अपनी पूर्व अवस्था प्राप्त की. इसी स्थान पर मां कालिका ने स्वयं को प्रकट कर लिया ताकि कोई असुर इस चमत्कारी कुंड का दुरुपयोग न कर सके। तब से यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में पूजनीय हो गया.

स्वयंभू मां कालिका का चमत्कारी मंदिर
मंदिर के पुजारी श्री महाराज बताते हैं कि मां कालिका स्वयंभू हैं, उनकी स्थापना किसी ने नहीं की. संतों, मनीषियों और देवताओं की साधना से प्रसन्न होकर मां भगवती इस अमृत कुंड पर स्वयं प्रकट हुईं. माना जाता है कि यह मंदिर ईसा पूर्व काल का है, और इसके कई उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में दर्ज हैं.

विदेशों से लेकर देशभर के श्रद्धालु पहुंचते हैं मां के दरबार
कालिकन धाम केवल स्थानीय श्रद्धालुओं का नहीं बल्कि देश-विदेश के भक्तों का भी आस्था स्थल बन चुका है. पुजारी श्री महाराज के अनुसार, विदेशों से भी श्रद्धालु यहां आकर मां भवानी की पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

राजनीतिक और फिल्मी हस्तियों का भी रहा आगमन
मां कालिका धाम की ख्याति इतनी व्यापक है कि यहां कई राजनीतिक और फिल्मी हस्तियां भी दर्शन करने पहुंच चुकी हैं. इनमें राहुल गांधी, स्मृति ईरानी, एन.डी. तिवारी, शरद पवार, राजीव गांधी जैसे बड़े नेता शामिल हैं. वहीं, फिल्मी जगत से राज बब्बर और अन्य कलाकारों ने भी यहां पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया है.

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राजनीति से फिल्मी दुनिया तक, सभी ने झुकााया सिर अमेठी के कालिकन धाम में



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