Jaunpur: आवारा कुत्तों पर SC के आदेश के बाद जौनपुर सख्त, तेजी से चल रहा रेस्क्यू अभियान
जौनपुर: अब शहर की गलियों और सड़कों पर आवारा कुत्तों का झुंड नजर नहीं आएगा. सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश के बाद जौनपुर में आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने का अभियान तेज कर दिया गया है. प्रशासनिक अमला इस दिशा में सक्रिय हो गया है और योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू हो चुका है. मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO) अजय अंबष्ट ने नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू किया जाए. फिलहाल जिले की तीनों नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में कुत्ते पकड़ने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है, लेकिन इस कमी को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है.
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ती कुत्तों के काटने की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, खेल परिसर और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थानों से आवारा कुत्तों को तत्काल हटाया जाए, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पकड़े गए कुत्तों को उचित देखभाल के साथ सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए और उनकी नसबंदी (बंध्याकरण) की व्यवस्था की जाए.
जौनपुर प्रशासन की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जौनपुर प्रशासन तुरंत हरकत में आया है. CRO अजय अंबष्ट ने नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों (EOs) को निर्देशित किया है कि वे एक विस्तृत कार्ययोजना बनाएं, जिसमें आवारा कुत्तों को पकड़ने, उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने, उनकी नसबंदी कराने और भोजन-पानी की व्यवस्था करने की रूपरेखा शामिल हो.
उन्होंने बताया कि बहुत जल्द जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) और अन्य संबंधित अधिकारी शामिल होंगे. इस बैठक में जिम्मेदारियों का बंटवारा किया जाएगा, ताकि अभियान प्रभावी ढंग से चलाया जा सके.
कुत्तों के साथ क्या होगा आगे?
पकड़े गए कुत्तों को किसी तरह की हानि नहीं पहुंचाई जाएगी. उन्हें पशु आश्रय स्थलों (Animal Shelters) में सुरक्षित रखा जाएगा, जहां उनकी नसबंदी और स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी. साथ ही उनके लिए खाने-पीने और देखभाल की व्यवस्था भी की जाएगी. उद्देश्य यह है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पशु अधिकारों का भी सम्मान किया जाए.
नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर टीमें बनाई जा रही हैं, जो वार्डवार अभियान चलाएंगी. इन टीमों में नगर कर्मियों के साथ स्थानीय प्रशासन और पशु विभाग के अधिकारी भी शामिल रहेंगे. अभियान के तहत पहले प्राथमिकता वाले स्थानों, स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक स्थल से आवारा कुत्तों को हटाया जाएगा.
जनहित और पशु संरक्षण दोनों पर ध्यान
प्रशासन का कहना है कि यह अभियान जनहित और पशु संरक्षण दोनों को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है. न तो कुत्तों को नुकसान पहुंचाया जाएगा और न ही उन्हें असुरक्षित वातावरण में छोड़ा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी के बाद उसी क्षेत्र में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि सुरक्षित आश्रय स्थलों में रखा जाएगा. CRO अजय अंबष्ट ने कहा कि यह कदम नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ एक मानवीय दृष्टिकोण से भी जरूरी है. कोई भी नागरिक कुत्तों के भय में न रहे और किसी भी पशु के साथ अमानवीय व्यवहार न हो, यही हमारी प्राथमिकता है.