Jimikand Pickle : सालों साल चलेगा जिमीकंद का अचार, चुटकियों में तैयार, ये रेसिपी कोई बताएगा नहीं
Suran ka achar kaise banaen/गोंडा. सर्दियों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में जिमीकंद (सुरन) खूब दिखाई देने लगता है. यह एक ऐसी सब्जी है जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है. आमतौर पर इसे सब्जी के रूप में खाया जाता है, लेकिन इसका अचार भी बेहद स्वादिष्ट और लंबे समय तक टिकने वाला होता है. अगर आप घर पर जिमीकंद का अचार बनाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान तरीके से आप स्वादिष्ट और सुगंधित अचार तैयार कर सकते हैं. लोकल 18 से बातचीत में गोंडा की गृहणी किरण मिश्रा बताती हैं कि जिमीकंद में भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. यह पाचन के लिए अच्छा होता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. नियमित रूप से इसका सेवन करने से पाचन मजबूत होता है और वजन नियंत्रित रहता है.
सामग्री : जिमीकंद (सुरन) – 1 किलो
सरसों का तेल – 250 ग्राम
नमक – स्वादानुसार
लाल मिर्च पाउडर – 2 बड़े चम्मच
हल्दी पाउडर – 1 बड़ा चम्मच
सरसों दाना – 2 बड़े चम्मच
सौंफ – 1 बड़ा चम्मच
हींग – एक चुटकी
दालचीनी – 1 टुकड़ा
बड़ी इलायची – 2 टुकड़ा
बनाने की विधि
किरण मिश्रा बताती हैं कि सबसे पहले जिमीकंद को अच्छी तरह धोकर छील लें और छोटे टुकड़ों में काट लें. उसके बाद उसको कद्दूकस करें. कद्दूकस करने के बाद 10 से 15 मिनट तक ऐसे छोड़ दें. फिर एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें. जब तेल हल्का धुआं देने लगे तो गैस बंद कर दें और तेल को थोड़ा ठंडा होने दें. उसके बाद जिमीकंद को उसी में डाल दें. अब इसमें सरसों दाना, सौंफ, हल्दी, लाल मिर्च, हींग और नमक डालें. तैयार अचार को साफ और सूखे कांच के जार में भरें. जार को 2–3 दिन तक धूप में रखें ताकि अचार अच्छे से सेट हो जाए और उसमें मसालों का स्वाद अच्छी तरह उतर जाए.
कैसे करें स्टोर
किरण मिश्रा बताती हैं कि घर पर बना जिमीकंद का अचार स्वाद में तीखा और खट्टा होने के साथ बहुत हेल्दी भी होता है. इसमें कोई केमिकल या प्रिजर्वेटिव नहीं डाला जाता, जिससे यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है. यह अचार खाने के साथ स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ पाचन में भी मदद करता है. इसे रोटी, पराठा या दाल-चावल के साथ खाएं. इसका स्वाद हर बार लाजवाब लगेगा. आचार को स्टोर करने के लिए सरसों के तेल का प्रयोग किया जाता है. सरसों का तेल पर्याप्त मात्रा में नहीं है तो गन्ने का सिरका का भी प्रयोग किया जा सकता है.