Lucknow News : ऑपरेशन सिंदूर में टेरर फंडिंग का आरोपी बताकर रिटायर्ड कर्मचारी से 12.5 लाख की ठगी

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Lucknow News : ऑपरेशन सिंदूर में टेरर फंडिंग का आरोपी बताकर रिटायर्ड कर्मचारी से 12.5 लाख की ठगी


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Cyber ​​fraud in Lucknow: रिटायर्ड कर्मचारी नरेंद्र मौर्य और उनकी बहू को “ऑपरेशन सिंदूर” में टेरर फंडिंग का आरोपी बताकर डिजिटल अरेस्ट में रखा. बैंक जांच का बहाना बनाकर उन्होंने 12.5 लाख रुपए ठगे. साइबर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

लखनऊ. लखनऊ में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और चौंकाने वाला तरीका अपनाया है. ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी और उनकी बहू को “डिजिटल अरेस्ट” में रख लिया. आरोपियों ने दोनों को आतंकवाद फंडिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी और बैंक खातों की जांच के बहाने 12.5 लाख रुपए हड़प लिए. मामला बांग्ला बाजार के दिलकुशा निवासी नरेंद्र मौर्य और उनकी बहू कामिनी मौर्य का है. लखनऊ साइबर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर शुरू हुआ फर्जी खेल

रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी नरेंद्र मौर्य को 30 सितंबर को एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई. कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत उनके बैंक खाते में पाकिस्तान से फंडिंग का ट्रांजैक्शन हुआ है. ठग ने दावा किया कि नरेंद्र मौर्य टेरर फंडिंग के मामले में आरोपी हैं और अगर वे सहयोग नहीं करेंगे तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा. यह सुनते ही बुजुर्ग घबरा गए और ठग के झांसे में आ गए.

व्हाट्सएप कॉल से भेजे गिरफ्तारी वारंट और वीडियो कॉल पर जांच अधिकारी बना ठग

पहली कॉल के बाद नरेंद्र मौर्य ने अपनी बहू कामिनी को पूरी बात बताई. कुछ देर बाद ठगों ने फिर कॉल किया और उन्हें भी जांच में सहयोग न करने पर जेल भेजने की धमकी दी. इसके बाद व्हाट्सएप पर गिरफ्तारी वारंट जैसे दस्तावेज भेजे गए. ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस का जांच अधिकारी “प्रेम कुमार गौतम” बताते हुए बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक दोनों किसी से बात नहीं करेंगे और उनके घर पर सर्विलांस लगा दिया गया है.

‘डिजिटल अरेस्ट’ में फंसे बुजुर्ग और बहू, ठगों को भेजे 12.5 लाख रुपए

ठगों ने कहा कि बैंक खातों की जांच जरूरी है, इसलिए उन्हें अपने अकाउंट की डिटेल देनी होगी. जांच के नाम पर बुजुर्ग से कई बार ऑनलाइन लेनदेन करवाए गए. 30 सितंबर से 4 अक्टूबर तक नरेंद्र मौर्य और उनकी बहू को “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर विभिन्न खातों में करीब 12.5 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए. ठगों ने उन्हें यह भी कहा कि अगर खाते क्लीन पाए गए तो पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा.

ठगों की बढ़ती मांग और धमकियों से टूटा भ्रम

4 अक्टूबर के बाद भी ठग रकम की और मांग करने लगे. उन्होंने कई बार धमकी भरे मैसेज भेजे. इस बीच कामिनी मौर्य ने फोन काटकर अपने पति को पूरी घटना बताई. जब पति ने जांच की तो परिवार को पता चला कि वे साइबर ठगों के जाल में फंस चुके हैं. इसके बाद उन्होंने लखनऊ साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई.

साइबर पुलिस जांच में जुटी, ठगी के नए तरीके से सतर्क रहने की अपील

लखनऊ साइबर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी का नया तरीका है. ठग लोग सरकारी एजेंसियों या पुलिस के नाम पर भय पैदा कर लोगों से बैंक डिटेल्स और पैसे ठग रहे हैं. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या व्हाट्सएप मैसेज पर अपनी निजी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें. किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन या व्हाट्सएप के जरिए डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं की जाती.

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