Lucknow News : यौन उत्पीड़न पीड़िता को मुआवजा देने के लिए चोटों का होना जरूरी नहीं, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
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Lucknow High Court News : रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना के तहत सरकार पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को 3 से 10 लाख तक की आर्थिक सहायता देती है. ये राशि पीड़ितों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दी जाती है, ताकि वे अपना जीवन पटरी पर ला सकें. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता को मुआवजा देने के लिए मेडिकल रिपोर्ट में चोट का होना अनिवार्य नहीं है. अगर एफआईआर और चार्जशीट में 4 पॉक्सो एक्ट का जिक्र है तो मुआवजा रोका नहीं जा सकता. गोंडा की नाबालिक यौन पीड़िता ने मुआवजा न मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
लखनऊ. हाईकोर्ट लखनऊ की बेंच का बड़ा आदेश सामने आया है. हाईकोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न की पीड़िता को मुआवजा देने के लिए चोटों का होना जरूरी नहीं है. लखनऊ हाईकोर्ट ने नाबालिग यौन पीड़िता को मिलने वाले मुआवजे के मामले में ये फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि पीड़िता को मुआवजा देने के लिए मेडिकल रिपोर्ट में चोट का होना अनिवार्य नहीं है. यदि एफआईआर और चार्जशीट में 4 पॉक्सो एक्ट (पेनेट्रेटिव सेक्सुअल एसॉल्ट) का जिक्र है तो मुआवजा रोका नहीं जा सकता. हाईकोर्ट ने गोंडा जिले की एक नाबालिक यौन पीड़िता की याचिका पर फैसला दिया है.
याचिका के मुताबिक 7 मार्च 2025 को नाबालिग पीड़िता का यौन शोषण हुआ. 25 जून 2025 को मामले में चार्जशीट दाखिल हो गई. इसके बावजूद यूपी रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना 2015 के तहत मिलने वाला मुआवजा उसे अब तक नहीं दिया गया है. राज्य सरकार के वकील ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में पेनेट्रेटिव चोट के सबूत नहीं मिलने के कारण जिला संचालन समिति ने मुआवजे का दावा निरस्त कर दिया. इस पर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पेनेट्रेटिव यौन शोषण हर मामले में शारीरिक चोट के रूप में दिखाई दे, ये जरूरी नहीं है. हाईकोर्ट ने जिला संचालन समिति के फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया.
उदारता से लागू करो
हाईकोर्ट ने पीड़िता को 10 दिनों के भीतर 3 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि यह योजना पीड़ितों के कल्याण के लिए है और इसे उदारता पूर्वक लागू किया जाना चाहिए. यूपी रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना 2015 के तहत जो महिलाएं या बालिकाएं दुष्कर्म, एसिड अटैक, घरेलू हिंसा या पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत आती हैं, उन्हें इस योजना के तहत न केवल आर्थिक बल्कि कानूनी सहायता भी मिलती है. जैसे ही उनके मामले में चार्जशीट दाखिल हो जाती है, उन्हें इस योजना का लाभ मिलने लगता है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें