Matar Cultivation Tips : बिना खाद मटर को मिलेगी नाइट्रोजन, लेकिन सिंचाई में चूकने पर मुरझा जाएंगे पौधे, जानें तरीका

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Matar Cultivation Tips : बिना खाद मटर को मिलेगी नाइट्रोजन, लेकिन सिंचाई में चूकने पर मुरझा जाएंगे पौधे, जानें तरीका


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Peas cultivation tips : मटर की फसल के लिए किसानों को सिंचाई का खास ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि मटर के पौधों की जड़ों के नीचे राइजोबियम पाया जाता है, जो पौधों को नाइट्रोजन ग्रहण करने के लिए तैयार करता है. राइजोबियम रासायनिक उर्वरक नाइट्रोजन की निर्भरता को कम करता है.

शाहजहांपुर. यूपी के शाहजहांपुर में धान की कटाई के बाद किसान अब मटर की फसल उगा रहे हैं. मटर की फसल किसानों को कम दिनों में अच्छा उत्पादन देती है. मटर दलहन की मुख्य फसलों में से एक है. इसकी फसल के लिए किसानों को सिंचाई का विशेष ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि मटर के पौधों की जड़ों के नीचे राइजोबियम पाया जाता है, जो वायुमंडल में मौजूद नाइट्रोजन को पौधों के ग्रहण करने के लिए उनको तैयार करता है. ऐसे में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और मृदा स्वास्थ्य में भी सुधार होता है.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक बताते हैं कि मटर की फसल की बुवाई का यह सही समय है. किसान हरी मटर की फलियों को बाजार में बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं, लेकिन हरी मटर की फसल में सिंचाई करते समय किसानों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है, क्योंकि अधिक सिंचाई करने से मटर के पौधों के नीचे पाए जाने वाला राइजोबियम नष्ट हो सकता है. इसके बाद पौधे धीरे-धीरे मुरझाकर सूख सकते हैं. ऐसे में जरूरी है कि किसान राइजोबियम का विशेष तौर पर ध्यान रखें. राइजोबियम रासायनिक उर्वरक नाइट्रोजन की निर्भरता को कम करता है.

क्या है राइजोबियम?

मटर की फसल के लिए राइजोबियम एक महत्त्वपूर्ण जैव उर्वरक है. यह जीवाणु वायुमंडल में मौजूद नाइट्रोजन को नाइट्रेट्स और अमोनियम में बदलकर सीधे मटर के पौधे को उपलब्ध कराता है. इसके प्रयोग से रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, जिससे खेती की लागत घटती है. फसल की ग्रोथ बेहतर होती है और उत्पादन में इजाफा होता है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी है.

कैसे करता है काम?

राइजोबियम जीवाणु मटर की जड़ों में प्रवेश करके गांठें (Nodules) बनाता है, यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी रूप जैसे अमोनिया (NH_3) में बदलता है, जिसे ‘नाइट्रोजन स्थिरीकरण’ कहते हैं. यह अमोनिया फिर पौधे की ओर से प्रोटीन बनाने के काम आती है. फसल कटाई के बाद, ये गांठें मृदा स्वास्थ्य में सुधार करती हैं.

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें

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बिना खाद मटर मिलेगी नाइट्रोजन, लेकिन सिंचाई में चूकने पर मुरझा जाएंगे पौधे



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