Meerut News: मेरठ के नशा मुक्ति केंद्र बने मौत का अड्डा, तीन दिन में दो मरीजों की गई जान; अब पुलिस खंगाल रही रिकॉर्ड
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Meerut News: मेरठ शहर के दो अलग-अलग नशा मुक्ति केंद्रों में तीन दिन के भीतर दो मरीजों की संदिग्ध मौतों ने हड़कंप मचा दिया है. इन घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने सभी नशा मुक्ति केंद्रों की जांच के आदेश दिए हैं. परिजनों ने केंद्र संचालकों पर पिटाई और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं. पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है.
Meerut Drug De-addiction Center: मेरठ नशा मुक्ति केंद्रों में लापरवाही का खामियाजा मरीजों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है. तीन दिन के भीतर दो मरीजों की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है. जिसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया है. एक युवक की मौत फांसी लगाकर आत्महत्या करने से हुई, जबकि दूसरे की मौत दम घुटने (अस्फिक्सिया) से बताई जा रही है. लगातार हो रही इन मौतों ने नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
लापरवाही और मारपीट का आरोप
इसके ठीक दो दिन बाद दूसरी घटना सामने आई, जिसमें दूसरे नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती मरीज की मौत दम घुटने से हो गई. प्रारंभिक जांच में पता चला कि केंद्र में वेंटिलेशन और सेफ्टी के उचित इंतजाम नहीं थे. मरीजों को एक छोटे कमरे में बंद कर दिया जाता था, जिससे दम घुटने जैसी स्थिति बन जाती थी. मृतक के परिजनों ने केंद्र संचालकों पर लापरवाही और मारपीट का आरोप लगाया है.
नशा मुक्ति केंद्रों की जांच हो रही
दोनों घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने सभी नशा मुक्ति केंद्रों की जांच के आदेश दे दिए हैं. अधिकारियों की टीम अब इन केंद्रों के रजिस्ट्रेशन, स्टाफ, सुरक्षा इंतजाम और मरीजों की देखरेख से जुड़ी व्यवस्थाओं की पड़ताल कर रही है. दोनों घटनाओं के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि जिले में लगभग आठ पंजीकृत और करीब 20 अपंजीकृत नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन दोनों घटनाओं के बाद सभी केंद्रों की जांच कराई जा रही है. जिन केंद्रों में नियमों का पालन नहीं पाया जाएगा. उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
मौत का अड्डा बनते जा रहे ये केंद्र
गौरतलब है कि इससे पहले भी मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से नशा मुक्ति केंद्रों में अमानवीय व्यवहार और मारपीट की शिकायतें आती रही हैं. लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने से ऐसे केंद्र बेलगाम हो गए हैं. लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि क्या नशे से मुक्ति दिलाने वाले ये केंद्र खुद लोगों के लिए मौत का अड्डा बनते जा रहे हैं? अब सबकी निगाहें प्रशासन की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं जो यह तय करेगी कि आखिर इन मौतों के पीछे लापरवाही थी या सिस्टम की खामियां.
दोनों केंद्रों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों में हत्या और लापरवाही की धाराओं में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. फिलहाल दोनों केंद्रों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और अन्य मरीजों से भी पूछताछ की जा रही है.

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें
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