Mushroom Farming: मशरूम की खेती में हीटर, बल्ब और अंगीठी वाला ये जुगाड़…सर्दियों में भी देगा तगड़ी पैदावार, जानें कैसे?

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Mushroom Farming: मशरूम की खेती में हीटर, बल्ब और अंगीठी वाला ये जुगाड़…सर्दियों में भी देगा तगड़ी पैदावार, जानें कैसे?


Mushroom Farming Tips: उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला आज मशरूम उत्पादन में प्रदेश का सिरमौर बन चुका है. यहां के युवा किसान परंपरागत खेती से हटकर अब बड़े पैमाने पर मशरूम की खेती करने लगे हैं. सर्दियों का मौसम मशरूम की खेती के लिए तो अनुकूल माना जाता है, लेकिन जब तापमान बहुत नीचे चला जाता है तो इसका असर उत्पादन पर पड़ता है. इसलिए किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि मशरूम के लिए कितना तापमान सही है और कम या ज्यादा तापमान में इसे कैसे मेंटेन किया जा सकता है.

सहारनपुर में बटन मशरूम की खेती
सहारनपुर में अधिकतर किसान बटन मशरूम की खेती करते हैं, क्योंकि यह लंबे समय तक उत्पादन देती है. फिलहाल बटन मशरूम लगाने का समय चल रहा है. जब इसमें स्पॉन डाला जाता है, तो कमरे का तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए. वहीं जब मशरूम की फ्रूटिंग यानी उत्पादन शुरू होता है, तब तापमान 15 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना जरूरी होता है.

जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, कमरे का तापमान घटने लगता है जिससे मशरूम की ग्रोथ प्रभावित होती है. इसलिए किसान भाइयों को चाहिए कि मशरूम उत्पादन वाले कमरे का तापमान हमेशा 15 से 18 डिग्री के बीच बना रहे.

कैसे करें तापमान को नियंत्रित
अगर तापमान बहुत नीचे चला जाए तो किसान बल्ब, धुआं रहित अंगीठी या हीटर का इस्तेमाल कर कमरे को गर्म रख सकते हैं. ध्यान रहे कि तापमान 18 डिग्री से ऊपर भी न जाए, वरना इससे भी उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

सहारनपुर का मशरूम केवल स्थानीय बाजारों में ही नहीं, बल्कि हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली तक भेजा जाता है. यही कारण है कि यहां के किसान सर्दियों में भी उत्पादन को बनाए रखने के लिए हर संभव तकनीक अपना रहे हैं.

खेती के लिए विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और प्रोफेसर डॉक्टर आई.के. कुशवाहा बताते हैं कि सफेद बटन मशरूम के लिए दो तरह के तापमान की आवश्यकता होती है. पहला चरण होता है जब स्पॉन को परसोराइज कंपोस्ट में मिलाया जाता है. इस दौरान लगभग 15 दिनों तक कमरे का तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए, क्योंकि इसी तापमान पर स्पॉन अच्छी तरह फैलता है.
इसके बाद जब स्पॉन रन पूरा हो जाता है और केसिंग मिट्टी डाली जाती है, तो धीरे-धीरे कमरे का तापमान घटाना जरूरी होता है. फ्रूटिंग यानी मशरूम के बनने की प्रक्रिया के लिए 15 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अनुकूल माना जाता है.

टेंपरेचर और नमी का संतुलन जरूरी
डॉक्टर कुशवाहा का कहना है कि अगर तापमान घटने लगे तो किसान हीटर, बल्ब या धुआं रहित अंगीठी का प्रयोग कर सकते हैं. लेकिन अगर कमरे में नमी बहुत बढ़ जाए तो हीटिंग थोड़ा बढ़ाना चाहिए और पानी की मात्रा कम करनी चाहिए. ज्यादा नमी से फफूंदी और गलन की समस्या हो सकती है, जो पूरे उत्पादन को खराब कर सकती है.



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