Mustard Cultivation : बुवाई से सिंचाई तक….अक्टूबर में इस तरीके से करें सरसों की बुवाई, ये सीक्रेट कोई नहीं बताएगा

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Mustard Cultivation : बुवाई से सिंचाई तक….अक्टूबर में इस तरीके से करें सरसों की बुवाई, ये सीक्रेट कोई नहीं बताएगा


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Sarson ki kheti kaise kare : सरसों की बुवाई से पहले खेतों को सही तरह से तैयार करना जरूरी है. फसल के अनुरूप मिट्टी को तैयार करने से पैदावार बेहतर होती है. खेतों की सही ढंग से जुताई जरूर करें. और क्या करना होगा, आइये कृषि एक्सपर्ट से जानते हैं.

आजमगढ़. अक्टूबर के महीने में खेतों में सरसों की बुवाई किसानों के लिए मुनाफे का सौदा हो सकती है. सरसों एक ऐसी फसल है, जिसे सालभर में एक बार उगाया जाता है और इसकी डिमांड पूरे साल रहती है. सरसों से बनने वाले तेल का व्यवसाय काफी अधिक मुनाफे वाला होता है. ऐसे में सरसों की खेती किसानों के लिए बेहद फायदेमंद हो सकती है. सरसों की खेती के लिए अक्टूबर का महीना सबसे फायदेमंद माना जाता है. फसल बुवाई से पहले खेतों को सही तरह से तैयार करना बेहद आवश्यक है. फसल के अनुरूप मिट्टी को तैयार करने से पैदावार समय पर और बेहतर होती है. सरसों की बुवाई के लिए मिट्टी को तैयार करने के लिए सबसे पहले उसे भुरभुरा बनाना जरूरी है. इसके लिए खेतों की सही ढंग से जुताई करनी पड़ती है.

इस तरह करें मिट्टी को तैयार

कृषि एक्सपर्ट डॉ. विमल बताते हैं कि सरसों की खेती के लिए बलुई दोमट से चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त है. इसका पीएच मान 6 से 7.5 होता है. खरीफ फसल की कटाई के बाद मिट्टी की गहरी जुताई कर उसे समतल और भुरभुरा बनाना जरूरी होता है. किसान अंतिम जुताई के समय खेतों में गोबर खाद के का छिड़काव भी कर सकते हैं. खेत में मिट्टी को तैयार करने के साथ ही बीज को भी सही तरह से उपचारित करना आवश्यक है. बीज को सही तरह से उपचारित करने के बाद बुवाई करना चाहिए. इससे फसल सही समय पर उगना शुरू होती है और समय पर तैयार भी हो जाती. इसके लिए बुवाई से पहले सरसों के बीज को कार्बनडाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित कर सकते हैं. बीज उपकरण करने के बाद इसकी बुवाई भी सही प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए.

इन बातों का भी ध्यान रखना जरूरी

सरसों की बुवाई में 5 किलो बीज प्रति एकड़ के हिसाब से काफी है. बुवाई के दौरान भी लाइन बाई लाइन करीबन 30 से 35 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर होनी चाहिए. इसके अलावा खेतों में प्रयोग होने वाले उर्वरक का छिड़काव मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार होना चाहिए. सरसों की फसल में कई तरह के रोगों का भी खतरा खतरा होता है. इसके लक्षण पहचान कर समय रहते उपचार करना जरूरी होता है. रोग के लक्षण के आधार पर फफूंद नाशक जैसे कार्बेंडाजिम या मैंकोजेब आदि दवाइयों का छिड़काव किया जा सकता है.  कीटनाशकों का दिन के दूसरी पहर के बाद छिड़काव ज्यादा प्रभावशाली होता है. सिंचाई के बाद भी इन कीटनाशकों का छिड़काव आवश्यकता अनुसार किया जाना चाहिए.

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें

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अक्टूबर में इस तरीके से करें सरसों की बुवाई, ये सीक्रेट कोई नहीं बताएगा



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