PCS : मिर्जापुर के किसान का बेटा प्राइवेट नौकरी करते हुए कैसे लाया 15वीं रैंक, जानें

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PCS : मिर्जापुर के किसान का बेटा प्राइवेट नौकरी करते हुए कैसे लाया 15वीं रैंक, जानें


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PCS 15th Rank Nikhilendra Singh : निखिलेंद्र सिंह की 10वीं और 12वीं की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से हुई है. दोनों प्रथम श्रेणी में पास हुए हैं. प्रतियोगी परीक्षा की प्रारंभिक पढ़ाई प्रयागराज से की. एक साल तैयारी की. कुछ खास नहीं लगने पर घर चले आए. कोचिंग का तरीका समझ नहीं आने पर सेल्फ स्टडी शुरू की. 2018 में पहली बार यूपीपीएससी की परीक्षा दी. कोचिंग का तरीका समझ नहीं आने पर सेल्फ स्टडी शुरू की. पिता शिवश्याम सिंह कहते हैं कि बेटे की मेहनत पर भरोसा था.

मिर्जापुर. खेतों में पिता की मेहनत देखकर बचपन से ही बेटे को सपना था कि अफसर बनूंगा. अफसर बनने के लिए एक दो नहीं बल्कि सात बार प्रयास किए. प्री पास होने के बाद सफर रुक सा जाता था. पिता किसान थे, लेकिन हौसला भगवान की तरह देते थे. अंततः 7वीं बार में बेटा अफसर बन ही गया. UPPSC 2024 का रिजल्ट घोषित होने के बाद मिर्जापुर के नीबी गहरवार के रहने वाले निखिलेंद्र सिंह टेजरी ऑफिसर बने हैं. उन्हें 15वीं रैंक हासिल हुई है. कई असफल प्रयास के बाद सफलता मिलने पर निखिलेंद्र सिंह कहते हैं कि सपना पूरा हो गया. जो सोचा था, जिसके लिए मेहनत किया था. आज पूरा हो रहा है. पिता ने कहा कि बेटों की पढ़ाई के लिए हमेशा समर्पित रहा हूं. सफलता पर हमें नाज है. बहुत खुशी महसूस हो रही है.

जब मन हो, तब पढ़ो

निखिलेंद्र सिंह की 10वीं और 12वीं की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से हुई है. दोनों में फर्स्ट डिवीजन से पास हुए हैं. प्रतियोगी परीक्षा के लिए प्रयागराज में एक साल तैयारी की. कुछ खास नहीं लगने पर घर चले आए. कोचिंग का तरीका समझ नहीं आने पर सेल्फ स्टडी शुरू की. 2018 में पहली बार यूपीपीएससी की परीक्षा दी. एक दो नहीं बल्कि 7 बार असफल हुए. 7वीं बार में सफलता हाथ लगी है. पढ़ाई के साथ प्राइवेट में जॉब भी करते थे. निखलेंद्र सिंह का मानना है कि डूबकर पढ़ाई करने की जगह जब मन हो तभी पढ़ाई करें. यह बेहतर होगा.

इसी पल का इंतजार

निखिलेंद्र सिंह ने बताया कि बचपन से ही पढ़ाई में एवरेज रहा. सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड होने के नाते उतना नंबर तो आना ही था. 2018 में मैंने पहली बार परीक्षा दी. उसके बाद अब तक 7 बार परीक्षा दे चुके हैं. हर बार प्री निकलने के बाद आगे का सफर 10 से 15 नंबरों से चूक जाता था. हालांकि, इस बार प्रयास सफल हुआ है. बतौर टेजरी ऑफिसर चयन हुआ है. 15वीं रैंक मिली है. खुशी है. काफी दिनों से इस पल का इंतजार था.

5 से 6 घंटे काफी

निखिलेंद्र सिंह ने बताया कि एक साल प्रयागराज से और कुछ महीने कोचिंग से तैयारी की. कुछ खास फर्क नहीं समझ आने पर घर आकर तैयारी शुरू की. कमाई के लिए प्राइवेट क्लासेज में बच्चों के नोट्स को चेक करते थे. 5 से 6 घंटे तक पढ़ाई की, उसके बाद मंजिल मिल गई है. हर बार असफल होने पर पिता हौसला देते थे कि बेटा सफल होगे. आज उनका बेटा सफल हो गया है. बेहद खुशी है. उनके भाई निलेन्द्र सिंह मध्य प्रदेश में कानूनगो हैं.

इससे अच्छा क्षण और क्या

पिता शिवश्याम सिंह ने बताया कि बेटे के मेहनत पर भरोसा था. असफल होने के बाद निराश होने पर हम प्रोत्साहित करते थे. परिवार से कोई दबाव नहीं था. हम बच्चों की शिक्षा पर बचपन से ध्यान देते थे. बेहद खुशी है कि दोनों बेटों को मुकाम मिल गया है. इससे अच्छा क्षण कोई नहीं है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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