Pilibhit News : जंगल से गांव तक नेपाली हाथियों का उत्पात! क्या रंग लाएगा पीलीभीत में WWF का जागरूकता अभियान?

0
Pilibhit News : जंगल से गांव तक नेपाली हाथियों का उत्पात! क्या रंग लाएगा पीलीभीत में WWF का जागरूकता अभियान?


Last Updated:

Pilibhit News : पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में नेपाली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. जंगल से निकलकर गांवों तक पहुंच रहे हाथियों से जान-माल और फसलों को भारी नुकसान हो रहा है. इस बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष पर लगाम लगाने के लिए अब WWF और वन विभाग जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहे हैं.

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व का नेपाली हाथियों से दशकों से पुराना नाता रहा है. नेपाली हाथियों की दस्तक यहां के अनुकूल वातावरण के चलते मानी जाती है. किसी भी वन क्षेत्र के लिहाज से यह एक शुभ संकेत है. मगर, जब इन हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर सड़क या रिहायशी इलाके में पहुंचता हैं, तो यह किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं लगते. ढाई माह पूर्व नेपाली हाथियों के झुंड ने एक सीमावर्ती गांव में तोड़फोड़ करने के साथ एक बुजुर्ग की जान भी ले ली थी. इससे पूर्व दो जंगली हाथियों ने जिले के कई हिस्सों में उत्पात मचाने के साथ काफी नुकसान भी किया था.

फसलों को हुए नुकसान पर पिछले साल किसानों को लाखों रुपये मुआवजा भी देना पड़ा था. जिले में जंगली हाथियों के लगातार बढ़ते उत्पात को देखते हुए अब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने पीटीआर के सहयोग से मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन की रुपरेखा तैयार की है. इसके तहत ही विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा, इन विशेषज्ञों के मदद से हाथी प्रभावित इलाकों में जागरुकता अभियान चलाएगा जाएगा.

हाथियों को पसंद है लग्गा-भग्गा
दरअसल, नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी की सीमा पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटी हुई है. पिछले कई सालों से नेपाली हाथी पड़ोसी देश नेपाल और पीलीभीत टाइगर रिजर्व से ही सटी हुई लखीमपुर खीरी की किशनपुर सेंचुरी से आते-जाते रहते हैं. हालांकि नेपाल की ओर से जंगली हाथी दशकों पूर्व से आते रहे हैं. उस दौरान बड़ी संख्या में हाथियों के अलावा गैंडें समेत अन्य वन्यजीवों की आवाजाही रहती थी. दरअसल लग्गा-भग्गा के जंगल के जिस रास्ते से नेपाली हाथी और गैंडें आते रहते हैं, वह इन वन्यजीवों का दशकों पुराना एक सुरक्षित कॉरिडोर रहा है.

टूट गया नेपाल से गठबंधन?
पूर्व में नेपाली हाथियों का झुंड यहां के जंगलों में कई-कई दिन तक विचरण कर वापस लौट जाता था. उस दौरान एक व्यवस्था थी कि जब नेपाली हाथी या गैंडे यहां आकर कई दिन तक वापस नहीं जाते थे तो स्थानीय वनकर्मी इसकी सूचना शुक्ला फांटो सेंचुरी के वनकर्मियों को देते थे. नेपाल के वनकर्मी हाथियों पर सवार होकर यहां आते थे और उन्हें वापस ले जाते थे. हालांकि पिछले कुछ सालों से यह सिलसिला कुछ कम हुआ है.

विशेषज्ञ करेंगे किसानों को जागरुक
जिले में जंगली हाथियों द्वारा नुकसान करने का सिलसिला लगातार जारी है. मगर अब जंगली हाथियों के बढ़ते उत्पात पर अंकुश लगाने की तैयारी चल रही है. दरअसल विश्व प्रकृति निधि (WWF) अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व के सहयोग से जनपद में मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन पर काम करने जा रहा है. इसके प्रथम चरण में उन विशेषज्ञों को बुलाया जा रहा है, जो हाथी प्रभावित इलाकों में जाकर वहां के ग्रामीणों को जागरुक करेंगे. इसको लिए बकायदा जागरुकता अभियान चलाया जाएगा, इन्हीं कार्यक्रमों में सुझाव भी लिए जाएंगें. उसके बाद उन्हीं सुझावों पर बचाव संबंधी कार्य किए जाएंगें, ताकि जिले में जंगली हाथियों द्वारा किए जा रहे नुकसान के अनवरत सिलसिले पर रोकथाम लगाई जा सके. विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि जंगली हाथियों द्वारा किए जा रहे नुकसान एवं संघर्ष की रोकथाम को लेकर रुपरेखा तैयार की गई है, जल्द ही इसे धरातल भी उतारा जाएगा.

About the Author

mritunjay baghel

मीडिया क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक समय से सक्रिय हूं और वर्तमान में News-18 हिंदी से जुड़ा हूं. मैने पत्रकारिता की शुरुआत 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से की. इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनाव में ग्राउंड…और पढ़ें

homeuttar-pradesh

जंगल से गांव तक नेपाली हाथियों का उत्पात! क्या रंग लाएगा पीलीभीत में WWF का..



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *