Pt. Chhannulal Mishra : संपत्ति के लिए उलझा रहा परिवार…सितारों में खो गया ठुमरी, दादरा, कजरी का उस्ताद
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Pt. Chhannulal Mishra Passes Away : पंडित छन्नूलाल मिश्र की तबीयत 7 महीने से खराब थी. 13 सितंबर की रात BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया. तबीयत में सुधार होने पर उन्हें 27 सितंबर को डिस्चार्ज किया गया था. सुबह 4.15 पर उनका निधन हो गया.
मिर्जापुर : शास्त्रीय गायक, पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार सुबह 4.15 पर निधन हो गया. वे 89 साल के थे. उन्होंने बेटी नम्रता मिश्रा के मिर्जापुर स्थित घर पर अंतिम सांस ली. गौरतलब है कि सांस की बीमारी से जूझ रहे श्री मिश्र तीन वर्षों से अपनी बेटी के घर मिर्जापुर में रह रहे थे. कुछ दिनों पहले अचानक तबियत ख़राब होने पर उन्हें बीएचयू में भर्ती कराया गया था. बीएचयू में इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया. हालांकि, घर पर ही डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी. बृहस्पतिवार को तबीयत ज्यादा बिगड़ने की वजह से उनका देहांत हो गया. संगीत की दुनिया में जितना बड़ा नाम छन्नूलाल मिश्र का था. पारिवारिक जीवन उतना ही उतार और चढ़ाव से भरा हुआ था. संपत्ति को लेकर परिवार में तकरार की स्थिति के बाद छन्नूलाल मिश्र मिर्जापुर में ही रह रहे थे.
संपत्ति के लिए कागजों में उलझा रहा परिवार
चार बेटियों में बड़ी बेटी का पहले ही निधन हो चुका था. वहीं, उनसे छोटी अनिता और ममता मिश्र की शादी हो गई है. नम्रता मिश्र अभी मिर्जापुर में है और भाई रामकुमार वाराणसी में रहते हैं. लंबे समय से छन्नूलाल मिश्र कहते आ रहे हैं कि उनकी बड़ी बेटी ममता मिश्र, बेटे रामकुमार और पोते संपत्ति के लिए परेशान करते थे. बड़ी बेटी ममता सबसे छोटी बेटी नम्रता को धमकाती भी थी. मैंने संपत्ति को बराबर के हिस्सों में बांट दिया था. मेरे पास कुछ भी शेष नहीं है. संपत्ति को लेकर मामला कागजों में उलझा हुआ है. उन्होंने वाराणसी जिले की प्रशासन पर भी उपेक्षा का आरोप लगाया था.
ठुमरी, दादरा, कजरी के उस्ताद थे छन्नूलाल मिश्र
आजमगढ़ के हरिहरपुर गांव में 3 अगस्त 1936 में पं. छन्नूलाल मिश्र का जन्म हुआ था. छन्नूलाल मिश्र के पिता बद्री प्रसाद मिश्र तबला वादक थे. पिता से संगीत की कलां को सिखा था. ठाकुर जयदेव सिंह से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वाराणसी को कर्मभूमि बनाया. छन्नूलाल मिश्र ठुमरी, दादरा, कजरी और चैती आदि संगीतों के उस्ताद थे. 2010 में पद्य भूषण से सम्मानित किया गया था. वहीं, 2020 में उन्हें पदम विभूषण दिया. छन्नूलाल मिश्र 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक भी बने थे. कुछ वर्षों से बेहद गुमनामी की जिंदगी जीने के लिए मजबूर थे.
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें