Public Opinion : “ऊंट के मुंह में जीरा…,” सरकार ने बढ़ाए गन्ने के दाम, भड़के सहारनपुर के किसान, कहा- हमारे लिए ठीक नहीं
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Public Opinion Saharanpur Farmers : यूपी सरकार ने गन्ने की कीमतें बढ़ा दी हैं. अब अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. लेकिन किसान इस फैसले से खुश नहीं है. कह रहे हैं इससे उनकी लागत बढ़ जाएगी. सरकार ने लॉलीपॉप थमाया है.
सहारनपुर. उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय लेते हुए चीनी मिलों की ओर से गन्ने की खरीद पर राज्य सलाहकार मूल्य (SAP) में 30 रुपये प्रति क्विंटल की है. इस फैसले से अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 370 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 360 रुपये से बढ़ाकर 390 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. गन्ना मूल्य बढ़ने से प्रदेश के लगभग 45 लाख गन्ना किसानों को इसका लाभ मिलेगा. लेकिन सहारनपुर के किसान इससे बिल्कुल भी खुश नहीं है. उनका कहना है कि 2 साल में सरकार ने मात्र ₹30 बढ़ाए हैं जबकि ₹30 बढ़ने से अब मजदूरी भी बढ़ जाएगी. खाद पर भी लगातार पैसे बढ़ाए जा रहे हैं. ऊंट के मुंह में जीरा डालने का काम किया है. किसानों ने का कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के मामले में फेल नजर आ रही है, जबकि पास ही के राज्य हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड में गन्ने का उत्पादन कम होता है लेकिन वहां गन्ने के दाम यूपी से अधिक हैं. सहारनपुर मंडल गन्ना उत्पादन में प्रदेश में नंबर एक स्थान रखता है, उसके बावजूद यहां के किसानों को सरकार ने लॉलीपॉप दिया है.
भारतीय किसान यूनियन टिकैत से जुड़े किसान अरुण राणा ने लोकल 18 से कहा कि मायावती सरकार में 2 साल तक लगातार ₹40-₹40 रुपये बढ़ाए. इन्होंने पिछले साल बढ़ाया ही नहीं और बढ़ाया तो अब ₹30, जो ऊंट के मुंह में जीरा है. ₹30 बढ़ने से खेती की लागत बढ़ जाएगी. अब हर व्यक्ति कहेगा कि गन्ने पर रेट बढ़ गया, हमारे भी बढ़ाओ. गन्ने पर ₹10 छिलाई बढ़ जाएगी. 50 जा रही थी अब 60 रुपये जाएगी. सरकार ने ये कहा था कि देरी से गन्ना भुगतान करने पर किसान को ब्याज दिया जाएगा. आज तक यह डबल इंजन की सरकार किसान को ब्याज नहीं दिला पाई. सहारनपुर में बजाज शुगर, दया सुगर और टोडर मिल पर किसानों का सैकड़ों करोड़ रुपये बकाया है. अरुण राणा ने कहा कि हम लोग मेहनत ज्यादा करते हैं, लागत ज्यादा लगाते हैं और रेट हमें कम मिल रहा है. जबकि सरकार ने खाद और पेस्टिसाइड दोगुना महंगा कर दिया. मजदूरों को भी किसान से छीनकर मनरेगा में ले गए. इससे अच्छा तो सरकार ₹30 को न ही बढ़ाती.
भले दाम घटा दो, लेकिन महंगाई करो कम
किसान देवेंद्र राणा ने कहा कि ₹30 बढ़ाने के बजाय आप ₹30 गन्ने पर और घटा दो, लेकिन खाद, पेस्टिसाइड पर पैसों को कम करो. जो 1800 रुपये का डाई का बैग है, उसे ₹200 का करो, डीजल 10 रुपये लीटर दो. गन्ने पर रेट बढ़ने से मजदूर भी ज्यादा मांगेगा. किस-किस को 30 रुपये में मैनेज करेंगे. एक बार किसानों से यह पूछा जाए कि उनकी लागत कितनी आती है और उस लागत के आधार पर उनका रेट तय किया जाए. किसान विनोद पुंडीर ने कहा कि 2 साल पहले एनपीके जो करीब 1250 रुपये का था, आज 1800 रुपये का है. 2 साल पहले मजदूर ₹300 लेते थे, आज उनके ₹500 हैं. अब हर कोई कहेगा गन्ने पर तो पैसे बढ़ गए, लेकिन कोई यह नहीं देखेगा कि लागत कितनी बढ़ गई, मजदूरी बढ़ जाएगी, छिलाई बढ़ जाएगी, बुवाई बढ़ जाएगी. गन्ना ऐसे ही पैदा नहीं होता. बड़ी मेहनत करनी पड़ती है. 11 महीने की मेहनत होती है. उसके बाद गन्ने को मिल भेजा जाता है वहां मिल मालिक गन्ना लेने के बाद बोलते हैं कि अब पैसों के लिए एक साल इंतजार करो.
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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