Ramdana Farming: रामदाना की खेती के फायदे ही फायदे, मुनाफे का है भंडार, न जानवरों की टेंशन, न लगेगा ज्यादा पैसा
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Ramdana Farming: रामदाना की खेती कम समय में तैयार हो जाती है और इसकी मार्केट में काफी डिमांड रहती है. इसके अच्छे मुनाफे को देख ज्यादातर किसान इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं.
रामदाना एक ऐसी फसल है जिसकी खेती कर किसान अच्छी आमदनी ले सकते हैं. वही रामदाना की बुवाई के लिए खेत की तैयारी करने के साथ ही उन्नतशील व अधिक उत्पादन वाले बीज का चयन भी करना जरूरी होता है. रबी सीजन की बोआई के लिए रामदाना की कुछ उन्नतिशील किस्मों की खेती कर अधिक पैदावार ली जा सकती है.

जिला कृषि अधिकारी राजितराम ने लोकल 18 से बातचीत में बताया हमारे यहां कई ऐसी फसले है. जिनकी खेती सीजन के तौर पर की जाती है. ऐसे में किसान अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो रामदाना एक ऐसी ही फसल है. जिससे लाखों रुपए की कमाई की जा सकती है. ऐसे में रामदाना की कई उन्नत किस्मे है जो कम समय और कम लागत में अधिक पैदावार देती हैं. इसकी खेती के लिए अक्टूबर व नवंबर का महीना उपयुक्त माना जाता है. इन किस्मों की खेती कर बढ़िया मुनाफा ले सकते हैं.

जीए-1- रामदाना की ये किस्म 110-115 दिन में पक कर तैयार होती है. पौधे की ऊंचाई 200-200 सैंटीमीटर होती है. इस किस्म की बाली का रंग हरा एवं पीला होता है. उपज 20-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर देती है.

वी एल चुआ-44 रामदाना की ये किस्म की बुवाई के 55 दिन बाद फुल आने शुरू हो जाते हैं. फसल पकने की अवधि 100 दिन, पौधे की ऊंचाई 135 सेंटीमीटर और औसतन पैदावार क्षमता 20 से 22 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक है.

अन्नपूर्णा रामदाना कि यह किस्म बुवाई के लगभग 105 से 110 दिनों में पाटकर तैयार हो जाती है. इसके पौधे की ऊंचाई 200 सेमी होती है. बाली का रंग हरा एवं पीला होता है. उपज 18 से 22 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है.

जी.ए.-2 यह किस्म बुवाई के 95 से 100 दिनों के अंदर पककर तैयार हो जाती है. इसके पौधों की ऊंचाई 180 से 200 सेंटीमीटर होती है. बाली का रंग लाल होता है. 1000 दानो का वजन 0.8 ग्राम और उपज की मात्रा 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होते है.

आरएमए- 7 रामदाने की इस किस्म क़े पौधे की ऊंचाई लगभग 1.20 मीटर होती है. फसल लगभग 125 से 130 दिन में पक कर तैयार हो जाती है. इन दानों में 12.1 प्रतिशत प्रोटीन तथा प्रोटीन में 5.8 प्रतिशत लाइसिन होता है. इसकी औसत पैदावार 14 कुंतल प्रति हैक्टेयर होती है.