Republic Day 2026 : भूप सिंह से लेकर गुरु प्रसाद तक…अमेठी के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के छुड़ाए पसीने, कई बार चटाई धूल
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Amethi Revolutionaries : देश आज गणतंत्र दिवस बना रहा है. यहां तक पहुंचने में कई लोगों ने अपनी जान कुर्बान कर दी. यूपी का अमेठी ऐसी धरती है, जिसने आजादी के संग्राम बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. आजादी के संघर्ष का जिक्र होते ही अमेठी की मिट्टी की महक उठती है. क्रांतिकारियों का बलिदान इतिहास के पन्नों से झांकने लगता है. अमेठी के वीर सपूतों की कहानी आज भी सम्मान से याद की जाती है. इन्होंने साबित कर दिया कि अमेठी की जनता गुलामी की बेड़ियों को स्वीकार नहीं करेगी.
अमेठी. जब भी देश की आजादी के संघर्ष का जिक्र होता है अमेठी की मिट्टी की महक उठती है. यहां के क्रांतिकारियों का बलिदान इतिहास के पन्नों से झांकने लगता है. आजादी की पहली चिंगारी से लेकर गणतंत्र की स्थापना तक, अमेठी की ग्राम पंचायतों और यहां के क्रांतिकारियों का खासा योगदान रहा. कइयों ने अपने प्राण न्योछावर कर अंग्रेजी हुकूमत को परास्त किया. आजादी की लड़ाई से लेकर गणतंत्र की स्थापना तक अमेठी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और वीर सपूतों की कहानी आज भी सम्मान से याद की जाती है.
सीधा लोहा
अमेठी के मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र का भाले सुल्तान इलाका और कोहरा क्षेत्र स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे केंद्र रहे, जहां की रणनीतियों से अंग्रेज भी खौफ खाते थे. कोहरा के रहने वाले भूप सिंह, कुंवर हिम्मत सिंह और मुसाफिरखाना भाग्य सुल्तान क्षेत्र के रहने वाले गुरु प्रसाद सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए अंग्रेजों से सीधा लोहा लिया. इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और महान क्रांतिकारियों ने न केवल युद्ध लड़ा, बल्कि कई मौकों पर फिरंगी सेना को धूल चटाई. इन्होंने साबित कर दिया कि अमेठी की जनता गुलामी की बेड़ियों को स्वीकार नहीं करेगी.
गंवानी पड़ी जान
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार से जुड़े संजय सिंह बताते हैं कि आजादी और गणतंत्र की इस लड़ाई में अमेठी का अहम योगदान रहा. अमेठी के वीर योद्धाओं ने अपने प्राणों की आहुति देकर अंग्रेजों को परास्त किया. हार नहीं मानी. यहां अंग्रेजों के साथ कई बार भीषण आमने-सामने का युद्ध हुआ. लेकिन, दुर्भाग्यवश कुछ घुसपैठियों और मुखबिरों की वजह से हमारे 600 से अधिक क्रांतिकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इन शहीदों का लहू आज भी अमेठी की माटी में लोकतंत्र और गणतंत्र की जड़ों को सींच रहा है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें