Study: खतरे में ताजमहल की खूबसूरती, जमा हो रही है लगातार माइक्रो प्लास्टिक

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Study: खतरे में ताजमहल की खूबसूरती, जमा हो रही है लगातार माइक्रो प्लास्टिक


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Taj Mahal Study News: ताजमहल की खूबसूरती खतरे में दिख रही है. हर साल करोड़ों रुपये इसकी खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए खर्च किए जाते हैं, लेकिन अब एक अध्ययन ने ऐसा खुलासा किया है, जिसने डरा दिया. आइए जानते हैं सबकुछ.

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ताजमहल.

आगरा: दुनिया में मोहब्बत की निशानी का अगर नाम लिया जाता है तो वो है ताजमहल. इसकी खूबसूरती को निहारने देश ही नहीं बल्कि दुनिया से भी लोग आते हैं. मगर, अब दुनिया के अजूबों में से एक ताज का वजूद खतरे में दिख रहा है. एक अध्ययन में डरावना खुलासा किया गया है. इसमें बताया कि सफेद संगमरमरी चमक के लिए मशहूर ताजमहल पर हवा में तैरते माइक्रोप्लास्टिक कण लगातार जमा हो रहे हैं.

हिंदुस्तान अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, आर्किलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) कोलकाता के दीपांकर बनर्जी और डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विवि औरंगाबाद के डॉ. राजदेव सिंह मंजर ने संयुक्त अध्ययन किया. इसमें यह चौंकाने वाली बात सामने आई. अध्ययन में 18 मीटर ऊंचाई पर 24 घंटे तक हवा के नमूने लिए गए. हर स्थान से तीन नमूने जुटाए गए, जिनसे करीब 10 सैंपल (30 फीसदी) का गहन विश्लेषण किया गया.

जांच में माइक्रोस्कॉपी, एफटीआईआर, सेम ईडीएक्स, एक्सआरडी जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया गया. एफटीआईआर परीक्षण में 82 से 95 फीसदी तक का सटीक मिलान (स्कोर) मिला, जबकि करीब 70 फीसदी नमूनों में 90 फीसदी से अधिक सटीकता पाई गई, जो प्लास्टिक की मौजूदगी की पुख्ता पुष्टि करते हैं. वैश्विक आंकड़े भी खतरे की गंभीरता को बताते हैं.

इसके मुताबिक, बाहरी वातावरण में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा 393 पार्टिकल्स प्रति घन मीटर तक पहुंच चुकी है, जबकि बंद कमरों में यह स्तर 0.13 से लेकर 14,088 पार्टिकल्स प्रति घन मीटर तक दर्ज की गई है. अध्ययन बताता है कि माइक्रोप्लास्टिक कण केवल समुद्र, मिट्टी की समस्या नहीं रहे. यह ऐतिहासिक धरोहरों तक पहुंच चुके हैं. अध्ययन अंतर्राष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंगर लिंक के मार्च 2026 अंक में प्रकाशित किया गया है.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें



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