Success Story : गोंडा का ये किसान कर रहा गन्ने की जैविक खेती, फसल 3 महीने पहले तैयार, 50 हजार लागत में 3.5 लाख मुनाफा

0
Success Story : गोंडा का ये किसान कर रहा गन्ने की जैविक खेती, फसल 3 महीने पहले तैयार, 50 हजार लागत में 3.5 लाख मुनाफा


Last Updated:

Organic Sugarcane Farming : गोंडा के इस किसान ने कमाल कर दिखाया है. अरबी से शुरू हुआ जैविक खेती का प्रयोग, धान से होता हुआ गन्ने तक पहुंच गया है. रसायन मुक्त गन्ने की खेती से गोंडा के प्रिंस सिंह की आमदनी लाखों में हो रही है. खेती का ये तरीका कम लागत में अच्छी पैदावार देकर जाता है. फसल तैयार भी पहले हो जाती है. मिट्टी और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है. एक अन्नदाता को और क्या चाहिए. आमतौर पर गन्ने का फसल 11 से 12 महीने की होती है. प्रिंस ने जैविक तरीके से गन्ने को 9 महीने में तैयार कर लिया. लोकल 18 ने उनसे बात की.

गोंडा. इस किसान का तरीका दूसरों से अलग है. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिला का ये किसान सुर्खियों में है. विकासखंड झंझरी स्थित ग्राम सभा केशवपुर पहाड़वा में रहने वाले किसान प्रिंस सिंह रसायन मुक्त (जैविक तरीके) से गन्ने की खेती कर रहे हैं. इस खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और लागत भी कम रहती है. प्रिंस गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट और जैविक दवाओं का उपयोग कर गन्ने की पैदावार ले रहे हैं. जैविक गन्ने की मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिल रही है. रसायन मुक्त गन्ने की खेती से गोंडा के प्रिंस सिंह की आमदनी लाखों रुपये में पहुंच रही है. ये खेती न सिर्फ किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है.

लोकल 18 से बातचीत में प्रगतिशील किसान प्रिंस सिंह बताते हैं कि उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की, लेकिन कुछ कारणवश उनको जॉब नहीं मिल पाई. फिर उन्होंने अपनी किस्मत खेती किसानी में आजमाई. वह इस समय लगभग 10 बीघा में गन्ने की खेती कर रहे हैं.

कहां से आया आइडिया

प्रिंस बताते हैं कि हमारे पिताजी भी गन्ने की खेती करते थे, लेकिन वह पारंपरिक तरीके से गन्ना उगाते थे. हमने शुरुआत टेक्निकल खेती से की. इस बार जैविक तरीके से गन्ना उगाया है. किसी भी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं किया. गन्ने की खेती का आइडिया पिताजी से मिला. प्रिंस सिंह बताते हैं कि गांव के बगल में शैलेंद्र सिंह वर्मीकंपोस्ट का प्लांट लगाए हुए हैं और वहीं से हम वर्मी कंपोस्ट लाते हैं. जैविक खेती की प्रेरणा हमको उन्हीं से मिली है.

कैसे हुई शुरुआत

प्रिंस बताते हैं कि जैविक खेती की शुरुआत हमने छोटे स्तर से की. सबसे पहले हमने घुइयां (अरबी) के खेत में 5 किलो कंपोस्ट डाला और इसका रिजल्ट काफी अच्छा मिला. उसके बाद हमने जैविक तरीके से धान की खेती की. उसमें भी अच्छा रिजल्ट मिला. इसके बाद पिताजी से कहा कि क्यों न इस बार गन्ने की खेती भी जैविक तरीके से की जाए. बुवाई के लगभग 9 महीने बाद ही गन्ने की कटाई कर रहे हैं. आमतौर पर गन्ने का फसल 11 से 12 महीने की होती है. हमने जैविक तरीके से गन्ने को 9 महीने में तैयार कर लिया है. प्रिंस सिंह बताते हैं कि उन्होंने 14201 और 16201 वैरायटी का गन्ना गया है. 2 एकड़ में 40 से 50 हजार रुपये की लागत लगी है. तीन से साढ़े तीन लाख रुपये की इनकम हो जाएगी.

About the Author

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

homeagriculture

50 हजार लागत, 3.5 लाख लाभ…ये किसान उगा रहा जैविक गन्ना, 3 महीने पहले तैयार



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *