Success Story : सुल्तानपुर के ये पांच टॉप किसान! कोई उगा रहा स्ट्रॉबेरी, कोई शिमला मिर्च, लाखों में कमाई
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Farmer Success Story : इन किसानों ने घाटे में बदलती जा रही खेती में नई जान फूंक दी है. सुल्तानपुर के इन किसानों ने नई तकनीकी और वैज्ञानिक खेती से निरंतर अच्छी पैदावार हासिल की है. आज हम ऐसे ही पांच प्रगतिशील किसानों के बारे में बात करेंगे, जिनकी खेती का तरीका किसी को भी निहाल कर देगा. ये अपने इलाके के चर्चित किसान हैं और आसपास के दूसरे कृषकों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं.
बदलते दौर में पढ़े-लिखे लोग खेती को बदल रहे हैं और वैज्ञानिक खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. सुल्तानपुर के रहने वाले किसान शिवम चतुर्वेदी उन्हीं में से एक हैं, पढ़ाई के साथ-साथ साथ सब्जी की खेती कर रहे हैं. सब्जी की खेती में उन्होंने फूलगोभी के पौधों को लगाया है, जो लगभग 50,000 से अधिक हैं. इससे उन्हें काफी मुनाफे की उम्मीद है.

सुल्तानपुर के लंभुआ तहसील के तेरये गांव के किसान विमलेश सिंह ने पारंपरिक खेती की जगह केला की खेती से दोगुना मुनाफा कमाया है. उन्होंने 10 एकड़ में 12,000 पौधे लगाए, जिसमें ₹2 लाख का खर्च आया और ₹5 लाख का केला बेचा. अब वे दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं. यह खेती जिला उद्यान विभाग के प्रोत्साहन और सब्सिडी से संभव हुई है. केले की खेती के बाद गेहूं भी उगाया जा सकता है.

गांव चकसिकरा पूरे अमीर अली के रहने वाले राकेश कुमार यादव ने 25 बीघा खेत में अमरूद का बाग तैयार किया है. शुरुआत में उन्होंने 2000 पेड़ों से की थी लेकिन आज उन्होंने लगभग 4000 अमरूद के पेड़ तैयार कर लिए हैं, जिससे अच्छी पैदावार हो रही है.

सुल्तानपुर के नरेंदापुर गांव के रहने वाले किसान राधेश्याम वर्मा ने स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं. उन्होंने स्ट्रॉबेरी का पौधा पुणे से मंगवाया था. उन्होंने 25000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए हैं. उनको इस खेती में डेढ़ लाख रुपये लागत आई है.

सुल्तानपुर के मेराज अहमद प्रगतिशील किसानों की सूची में टॉप स्थान रखते हैं. मेराज ने 7 साल तक आर्मी की तैयारी की और साथ में आईटीआई भी करते रहे. भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना जब पूरा नहीं हुआ तो मेराज ने शिमला मिर्च की खेती शुरू की, जिसमें आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को शामिल किया है. इस खेती से उन्हें लाखों रुपये की कमाई हो रही है.