UPSC प्रीलिम्स को करना है क्लियर, तो इन तीन बातों का बांध लें गांठ

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UPSC प्रीलिम्स को करना है क्लियर, तो इन तीन बातों का बांध लें गांठ


ग्रेटर नोएडा:  UPSC सिविल सेवा परीक्षा का प्रीलिम्स स्टेज लाखों अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है. हर साल बड़ी संख्या में उम्मीदवार अच्छे ज्ञान के बावजूद सिर्फ़ रणनीति की कमी के कारण प्रीलिम्स में ही बाहर हो जाते हैं. ऐसे में अनुभवी मेंटर करन मेंघी, जो पिछले 5 वर्षों से हज़ारों UPSC aspirants को मार्गदर्शन दे रहे हैं, प्रीलिम्स को क्लियर करने के लिए तीन सबसे अहम पिलर्स ज़ोर देते हैं. CSAT, PYQs और मॉक टेस्ट.

CSAT की प्रैक्टिस पहले दिन से शुरू होनी चाहिए

उन्होंने बताया कि सबसे पहले बात CSAT (Civil Services Aptitude Test) की. अक्सर उम्मीदवार यह मान लेते हैं कि CSAT क्वालीफायिंग है, इसलिए इसे अंत में देखा जाएगा. यही सोच प्रीलिम्स में असफलता का एक बड़ा कारण बनती है. करन मेंघी के अनुसार, CSAT की प्रैक्टिस पहले दिन से शुरू होनी चाहिए और इसे पूरी तैयारी के दौरान जारी रखना चाहिए. कंप्रेहंशन, बेसिक मैथ्स और लॉजिकल रीजनिंग जैसे टॉपिक्स लगातार अभ्यास से ही मजबूत होते हैं. अचानक आख़िरी महीने में CSAT उठाने से रिस्क बढ़ जाता है, क्योंकि कई योग्य उम्मीदवार सिर्फ़ CSAT कटऑफ के कारण बाहर हो चुके हैं.

प्रीवियस ईयर के प्रश्न

बताया कि दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है PYQs यानी प्रीवियस ईयर के प्रश्न PYQs सिर्फ़ practice का साधन नहीं, बल्कि UPSC की सोच को समझने की चाभी हैं. पिछले 10-15 वर्षों के प्रश्न यह साफ़ दिखाते हैं कि आयोग किन टॉपिक्स को बार-बार पूछता है, प्रश्नों की depth क्या होती है और ऑप्शयंस किस तरह ट्रैप के रूप में रखे जाते हैं. करन मेंघी सलाह देते हैं कि aspirants हर सब्जेक्ट के साथ-साथ उसके PYQs ज़रूर सॉल्व करें और यह ऐनालाइज करें कि सवाल क्यों पूछा गया और सही उत्तर क्यों सही है. PYQs से प्रिपरेशन को डायरेक्शन मिलती है और अनावश्यक पढ़ाई से बचाव होता है.

मॉक टेस्ट है जरूरी

तीसरा पिलर है मॉक टेस्ट इसे सिर्फ पढ़ना और रिवाइज करना पर्याप्त नहीं है. एग्जाम टेम्परामेंट विकसित करना भी उतना ही ज़रूरी है. मॉक Tests, aspirants को टाइम मैनेजमेंट, एक्यूरेसी और प्रेशर हैंडलिंग सिखाते हैं. करन मेघी के अनुसार, मॉक्स का असली फायदा test देने से ज़्यादा टेस्ट एनालिसिस में है. हर टेस्ट के बाद यह देखना ज़रूरी है कि गलतियां कहाँ हुईं, गेसवर्क कितना था और कौन-से टॉपिक्स वीक हैं. नियमित मॉक प्रैक्टिस से aspirant अपनी स्ट्रेटेजी को समय रहते सुधार सकता है.

सिर्फ़ सिलेबस कवर करना ही काफी नहीं

बताया कि, UPSC प्रीलिम्स क्लियर करने के लिए सिर्फ़ सिलेबस कवर करना ही काफी नहीं है. CSAT की निरंतर प्रैक्टिस, PYQs का गहन विश्लेषण और मॉक टेसट्स के ज़रिए सेल्फ -अस्सेस्मेंट ये तीनों मिलकर प्रीलिम्स की तैयारी को मजबूत आधार देते हैं. सही रणनीति, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के साथ प्रीलिम्स की बाधा को पार किया जा सकता है.



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