Uses Of Cow Dung: गांव का कचरा या शहर का खजाना, गाय के गोबर से बन रहा गमला, दीया और सजावट का सामान!
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Uses Of Cow Dung:गाय का गोबर अब सिर्फ कचरा नहीं रह गया है. वैज्ञानिकों ने इसे गमले, दीये, ईंट, लकड़ी जैसी टिकिया और यहां तक कि खाना पकाने वाली गैस में बदलकर इसे बहुमूल्य साधन बना दिया है. इससे न सिर्फ पर्यावरण बचता है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आमदनी का भी नया जरिया खुल रहा है. गोबर अब प्रकृति का उपहार बन चुका है, जिसे सही तरीके से इस्तेमाल करके हम जीवन और खेती दोनों को बेहतर बना सकते हैं.
झांसी. अक्सर गाय के गोबर को बेकार समझ लेते हैं, गांव में लोग इसे खेत में डाल देते हैं या कंडे बनाकर जला लेते हैं. लेकिन अब कृषि वैज्ञानिकों ने दिखा दिया है कि जिस गोबर को हम वेस्ट मानते हैं. वही हमारे काम की बहुत कीमती चीज बन सकती है. गोबर से ऐसी चीज बनाई जा रही हैं जो हमारी रोज की जिंदगी में काम आती हैं. वैज्ञानिकों ने गाय के गोबर को साफ कर सुखाया फिर उसे खास तरीके से तैयार किया. इस गोबर में मिट्टी और दूसरे सुरक्षित पदार्थ मिलाकर मजबूत सामान बनाए गए. सबसे पहले गोबर से गमले बनाए गए ये गमले हल्के होते हैं. पौधों के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं. जब पौधा बड़ा हो जाता है तो गमले को सीधे मिट्टी में दबाया जा सकता है. गोबर से बना गमला खुद मिट्टी में मिल जाता है, इससे कचरा भी नहीं बनता और जमीन भी खराब नहीं होती.
इसके अलावा गोबर से दीये बनाए गए. जो त्योहार पर जलाए जा सकते हैं. गोबर से ईंट जैसी टिकिया भी बनाई गई जिससे छोटे घर या दीवार बनाई जा सकती है. गोबर से लकड़ी जैसे लठ भी बनाए गए जो जलाने के काम आते हैं. इससे पेड़ काटने की जरूरत कम हो सकती है, कुछ जगहों पर गोबर से प्लेट और कटोरी भी बनाई जा रही हैं. जो एक बार इस्तेमाल के बाद मिट्टी में मिल जाती हैं, इससे प्लास्टिक का कचरा कम होता है.
गोबर में ऐसे गुण होते हैं जो कीट को दूर रखने में करते हैं मदद
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि गोबर से गैस बनाई जा सकती है, जिसे खाना पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है. इस गैस को गोबर गैस कहा जाता है. इससे धुआ कम निकलता है और रसोई साफ रहती है. बचा हुआ हिस्सा खेत में खाद बनकर काम आता है. इससे फसल अच्छी होती है और जमीन की ताकत बढ़ती है. आज कई जगह गोबर से अगरबत्ती साबुन और फर्श साफ करने वाला द्रव भी बनाया जा रहा है. लोग इन्हें खरीद रहे हैं क्योंकि ये प्राकृतिक हैं और शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाते.
गोबर में ऐसे गुण होते हैं जो कीट को दूर रखने में मदद करते हैं इसलिए गांव में लोग पहले से ही घर के आंगन में गोबर से लीपाई करते थे ताकि घर ठंडा रहे और कीट दूर रहें. अब शहरों में भी लोग समझ रहे हैं कि गोबर बेकार नहीं है बल्कि यह प्रकृति का उपहार है अगर हम इसे सही तरह से इस्तेमाल करें तो यह रोजगार भी दे सकता है. गांव की महिलाएं गोबर से गमले दीये और दूसरी चीजें बनाकर बाजार में बेच सकती हैं इससे उनकी आमदनी बढ़ सकती है. इस तरह जिस गोबर को हम कभी फेंक देते थे वही आज काम की चीज बन गया है. वैज्ञानिकों ने हमें सिखाया है कि प्रकृति की हर चीज की कीमती होती है.
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