Varanasi Dalmandi: जब महात्मा गांधी ने की थी तवायफों से भेंट, आर्थिक मदद लेने से किया इनकार, जानें दालमंडी की अनसुनी कहानी

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Varanasi Dalmandi: जब महात्मा गांधी ने की थी तवायफों से भेंट, आर्थिक मदद लेने से किया इनकार, जानें दालमंडी की अनसुनी कहानी


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Varanasi Dalmandi News: देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी ने कई आंदोलन चलाएं थे.असहयोग आंदोलन भी उनमें से एक था, जो अगस्त 1920 से फरवरी 1922 तक चला. इस असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी देश के अलग-अलग हिस्सों में जा रहे थे. इसी दौरान उनकी मुलाकात दालमंडी के तवायफों से हुआ था.

वाराणसी: वाराणसी का दालमंडी इतिहास बनने जा रहा है. हर दिन इस बाजार में प्रशासन का एक्शन जारी है. जल्द ही दालमंडी अपने नए स्वरूप में सामने आएगा, लेकिन बनारस के इस दालमंडी के कई अनसुने और अनकहे किस्से हैं, जिन्हें आज भी कम ही लोग जानतें है. ऐसा ही एक किस्सा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और दालमंडी के तवायफों से जुड़ा हुआ है.

देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी ने कई आंदोलन चलाए थे. असहयोग आंदोलन भी उनमें से एक था, जो अगस्त 1920 से फरवरी 1922 तक चला. इस असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी देश के अलग-अलग हिस्सों में जा रहे थे. इसी दौरान उनकी मुलाकात दालमंडी के तवायफों से हुई थी. उस दौरान तवायफों ने भी तवायफ सभा का गठन किया था और वो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से स्वतंत्रता आंदोलन में मदद कर रही थी. इसी दौरान जब उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई तो उन्होंने इस आंदोलन में सहयोग हेतु आर्थिक मदद की पेशकश की, लेकिन महात्मा गांधी ने नैतिकता की बात कहकर उनसे आर्थिक मदद लेने से मनाकर दिया था.

रूठ गई थी दालमंडी की तवायफें

वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु राज पांडेय ने लोकल 18 को बताया कि उनके स्वत्रंत्रता आंदोलन में सहयोग के पेशकश को जब महात्मा गांधी ने मना कर दिया तो दालमंडी की तवायफें रूठ गई. इसके बाद तवायफों ने अपने तानपुरा, सारंगी, तबले के अलावा अन्य इंस्टूमेंट को गंगा को प्रवाहित कर दिया. इसके बाद वो अपने कोठे पर चरखा चलाने लगी और उससे सूत निकालने और भरने का काम शुरू कर दिया. इस तरह तवायफों ने अपना विरोध भी किया और स्वतंत्रता आंदोलन में मदद भी की.

अदा, अदब और तहजीब के लिए मशहूर था दालमंडी

वाराणसी के दालमंडी की तवायफों की तुलना दिल्ली के जीबी रोड और कोलकाता के सोनागाछी के तवायफों से नहीं की जा सकती है, क्योंकि वाराणसी के दालमंडी की तवायफें देह व्यापार का काम नहीं करती थी, बल्कि वो अपने अदा, अदब और तहजीब के लिए पूरे देश में जानी जाती थी. इनके कोठों पर बड़े-बड़े राजा-महाराजा और धन्ना सेठ आया करते थे.

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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