Wheat Crop : शीतलहर में गेहूं की सिंचाई कितनी जरूरी, ये कब खतरनाक? थोड़ी सी चूक कर देगी पूरी फसल तबाह

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Wheat Crop : शीतलहर में गेहूं की सिंचाई कितनी जरूरी, ये कब खतरनाक? थोड़ी सी चूक कर देगी पूरी फसल तबाह


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Wheat crop care in winter : जैसे-जैसे शीतलहर का असर बढ़ता है, वैसे-वैसे गेहूं की देखभाल किसानों के लिए चुनौती बनती जाती है. ठंड में थोड़ी सी लापरवाही फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. खासकर सिंचाई को लेकर गलत फैसला सीधा उत्पादन पर असर डाल सकता है. मौसम की जानकारी लेकर, सही समय और सही मात्रा में की गई सिंचाई गेहूं की फसल को शीतलहर से बचाने में अहम भूमिका निभाती है. अत्यधिक ठंड या पाले की स्थिति में सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान और गिर सकता है, जो फसल के लिए खतरनाक है.

शीतलहर के दौरान गेहूं की सिंचाई बेहद सोच-समझकर करनी चाहिए क्योंकि अत्यधिक ठंड या पाले की स्थिति में सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान और गिर सकता है. इससे पौधों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और सीधे बढ़वार भी रुक सकती है.

नमी की जरूरत

बलिया के कृषि वैज्ञानिक प्रो. अशोक कुमार सिंह के मुताबिक, शीतलहर में सिंचाई तभी करना चाहिए, जब खेत में नमी की वास्तविक कमी हो. अगर मौसम विभाग ने पाले की चेतावनी जारी की हो, तो सिंचाई कुछ दिनों के लिए टाल देना बेहतर होता है. अनावश्यक पानी फसल के लिए फायदे की जगह नुकसानदायक हो सकता है.

CRI अवस्था

गेहूं की पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद क्राउन रूट इनिशिएशन (CRI) अवस्था में होती है. यह सबसे अहम सिंचाई मानी जाती है. शीतलहर के समय इस अवस्था में हल्की और समान सिंचाई करें, ताकि पानी खेत में जमा न हो और जड़ों तक सही नमी पहुंच सके.

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पानी की मात्रा

शीतलहर में गेहूं के खेत में 6 से 7 सेंटीमीटर पानी पर्याप्त होती है. नहर या ट्यूबवेल से पानी धीरे-धीरे दें. तेज बहाव से मिट्टी सख्त हो जाती है, जिससे जड़ों को नुकसान और पौधों की बढ़वार पर असर पड़ सकता है.

सिंचाई का समय

सर्दियों के मौसम में गेहूं की सिंचाई हमेशा दिन में करना उचित होता है. सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. रात या बहुत सुबह सिंचाई करने से खेत में पाले का खतरा बढ़ सकता है, जो फसल के लिए घातक साबित होता है. फसल को पाले से बचाना चाहिए.

पोषण और खरपतवार

शीतलहर के दौरान केवल सिंचाई ही नहीं, बल्कि खरपतवार नियंत्रण और संतुलित उर्वरक प्रबंधन भी बहुत जरूरी है. कमजोर और पोषक तत्वों की कमी वाले पौधे ठंड का असर जल्दी झेलते हैं. ऐसे में स्वस्थ फसल ही शीतलहर का मुकाबला बेहतर ढंग से करने में सक्षम होती है.

सही निर्णय, बेहतर उत्पादन

मौसम की जानकारी लेकर, सही समय और सही मात्रा में की गई सिंचाई गेहूं की फसल को शीतलहर से बचाने में अहम भूमिका निभाती है. जागरूकता और सावधानी अपनाकर किसान न केवल फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन की मजबूत नींव भी डाल सकते हैं. ऐसा करने से फसल में जमकर मुनाफा होता है.

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शीतलहर में गेहूं सिंचाई कितनी जरूरी, ये कब खतरनाक? थोड़ी सी चूक कर देगी तबाह



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