अगर लंबे समय तक मर्जी से बनाए संबंध तो दुष्कर्म नहीं… इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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अगर लंबे समय तक मर्जी से बनाए संबंध तो दुष्कर्म नहीं… इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला


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High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि अगर महिला ने अपनी मर्जी से संबंध बनाए हैं, तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट.

इलाहाबाद: कई बार ऐसे मामले सामने आ जाते हैं, जिन्हें जानकर पैरों तले जमीन खिसक जाती है. ऐसा ही एक मामला इलाहाबाद कोर्ट पहुंचा. यहां एक पीड़िता ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कई बार संबंध बनाने के आरोप लगाए. इस पर जब सुनवाई हुई तो सबूत ही नहीं मिले. तब अदालत ने ऐसे मामलों पर सख्ती बरतने के लिए एक केस में अहम फैसला सुनाया. अदालत का कहना है कि अगर महिला ने अपनी मर्जी से लंबे समय तक संबंध बनाए हैं तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा.

यह है मामला
पूरा मामला बरेली के थाना इज्जतनगर का है. यहां पुलिस को 1 दिसंबर 2024 में शिकायत दी गई थी. पीड़िता ने आरोप लगाया था कि पीसीएस की तैयारी के दौरान उसकी दोस्त के भाई ने होटल में बुलाकर दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बना ली. बाद में वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कई बार संबंध बनाए. साथ ही, उसने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी के चचेरे भाई ने भी संबंध बनाने का दबाव डाला और मना करने पर वीडियो परिवार को भेज दी. आरोपित पक्ष ने बीएनएसएस की धारा 528 के तहत आवेदन देकर चार्जशीट और समन आदेश सहित पूरी कार्रवाई रद्द करने की मांग की थी.
क्या बोला हाईकोर्ट?
इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनवाई की. कोर्ट ने कहा कि अगर महिला ने अपनी मर्जी से संबंध बनाए हैं, तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा. कोर्ट ने आरोपी नीरज और अन्य के खिलाफ दर्ज केस को रद्द कर दिया. न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे साबित हो कि आरोपित ने पीड़िता की फोटो या वीडियो वायरल की. वॉट्सऐप चैट से यह भी सामने आया कि दोनों के बीच नियमित बातचीत थी. ब्लैकमेल का आरोप भी साबित नहीं होता.

अदालत ने यह भी कहा कि अगर शादी का वादा शुरू से ही झूठा था, तो पीड़िता तुरंत शिकायत करती. मगर, उसने एक साल तीन महीने बाद एफआईआर दर्ज कराई. इससे यह संकेत मिलता है कि संबंध आपसी सहमति से थे. एक विवाहित महिला लंबे समय तक किसी के साथ संबंध बनाए रखे और फिर दबाव की बात करे, यह समझना कठिन है.

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले प्रशांत बनाम दिल्ली राज्य का जिक्र किया. इसमें कहा गया है कि अगर दो लोग लंबे समय तक संबंध में रहें, तो यह मानना मुश्किल है कि एक पक्ष पूरी तरह दबाव में था.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें



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