अधिकारी हो तो ऐसा! मुरादाबाद सीडीओ ने ऐसे बचाया डेढ़ करोड़ लीटर पानी

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अधिकारी हो तो ऐसा! मुरादाबाद सीडीओ ने ऐसे बचाया डेढ़ करोड़ लीटर पानी


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Moradabad news today hindi: पानी बचाने लिए सभी को जिम्मेदार होना चाहिए. इसके लिए तमाम तरह के प्रयास किए जाते रहते हैं. हालांकि…..

इस तकनीक से बचाया हजारों लीटर पानी।

रिपोर्ट: पीयूष शर्मा

मुरादाबाद: पानी की बर्बादी रोकने के लिए मुरादाबाद जिले में स्वच्छ प्रौद्योगिकी काउंटर करंट मैकेनिज्म (सीसीएम) तकनीक कारगर साबित हो रही है. जिला प्रशासन, आइआइटी कानपुर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के संयुक्त प्रयासों से इस तकनीक को उद्योगों में अपनाया जा सा है. जनपद में 192 फैक्ट्रियों में सीसीएम डिवाइस लगाकर दो साल में लगभग डेढ़ करोड़ लीटर पानी बचाया जा चुका है. यह प्रयास लगातार जारी है और उद्योगों को इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

सीसीएम तकनीक से बचाया जा रहा पानी
पीतलनगरी के नाम से दुनिया में पहचान बनाने वाले मुरादाबाद में 10 हजार से अधिक छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां और कारखाने हैं. सीसीएम तकनीक पानी बचाने का एक आधुनिक तरीका है जो फैक्ट्रियों में उपयोग किए जाने वाले पानी की खपत को नियंत्रित करता है. इसमें एक मिश्रित पालीप्रोपलीन (पीपी) टैंक होता है, जो विभिन्न भागों में विभाजित होता है.

प्रत्येक कक्ष को अलग करने वाली दीवारों पर छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं. इससे पानी एक कक्ष से दूसरे कक्ष में प्रवाहित होता है. इसके अलावा, यह तकनीक सेंसर आधारित होती है जो जरूरत के अनुसार ही पानी की सप्लाई करता है. इस तकनीक के उपयोग से फैक्ट्रियों और कारखानों में अनावश्यक रूप से पानी के बहाव को रोका जा रहा है. सेंसर के जरिए पानी की उपलब्धता को नियंत्रित किया जाता है. जब जरूरत होती है तभी पानी टंकी में प्रवाहित होता है और जैसे ही जरूरत पूरी हो जाती है तो पानी की सप्लाई खुद से बंद हो जाती है. कम लागत और अधिक बचत से इस तकनीक को अपनाने में अधिक खर्च नहीं आता. मात्र 20,000 रुपये की लागत में इसे एक यूनिट में स्थापित किया जा सकता है.

पानी की खपत में आएगी कमी
लंबे समय तक पानी की बचत आर्थिक रूप से भी लाभदायक है. पहले पारंपरिक घुलाई प्रणाली में 24 घंटे मशीनें चालू रहती थीं. इससे अधिक पानी की खपत होती थी लेकिन अब सीसीएम तकनीक से नियंत्रित जल प्रवाह के कारण पानी की खपत में भारी कमी आई है. मुरादाबाद जिला रामगंगा नदी के किनारे स्थित है और यहां उद्योगों से निकलने वाला पानी रामगंगा में बह जाता था. इससे जल प्रदूषण बढ़ता था. सीसीएम तकनीक से जल संरक्षण के साथ साथ गंगा की स्वच्छता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है.

जिला गंगा समिति (डीजीसी) और उद्योग बंधु की बैठक में उन्होंने पीतल और अन्य उत्पादों से जुड़ी फैक्ट्रियों को ताजे पानी की खपत कम करने के निर्देश दिए. इसके बाद आइआईटी कानपुर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने जिला प्रशासन से सहयोग से मुरादाबाद के मेटलवेयर सेक्टर में जल संरक्षण के लिए विशेष मुहिम चलाई है. इस तकनीक के क्रियान्वयन में मेटल हैंडीक्राफ्ट सर्विस सेंटर (एमएचएससी), मुरादाबाद का भी महत्वपूर्ण योगदान है. एमएचएससी के सहयोग से उद्योगों में पानी की बचत के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. सीसीएम तकनीक के जरिए मुरादाबाद जिले में जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. इस तकनीक की मदद से पानी की बचत होने लगी है और आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है. यदि इस तकनीक को सभी उद्योगों में लागू किया जाए तो इससे जल संकट को कम किया जा सकता है.

सीसीएम तकनीक इस तरह करती है पानी की बचत
परंपरागत प्रणाली में पानी की अधिक वर्बादी होती थी. सीसीएम तकनीक में केवल एक ही नल से ताजा पानी की आपूर्ति होती है. जबकि पारंपरिक सिस्टम में दो-तीन नल होते थे. सीसीएम में टोटल डिसॉल्ट सालिड्स (टीडीएस) को मापा जाता है, जिससे पानी की गुणवत्ता को नियंत्रित किया जाता है. जैसे ही पानी प्रदूषित होता है सेंसर से पानी की सप्लाई को कंट्रोल किया जाता है और जरूरत के अनुसार ही पानी दिया जाता है. पर्याप्त मात्रा में पानी मिलते ही आपूर्ति स्वतः बंद हो जाती है.

192 प्लांट में अपनाई गई तकनीक
मुख्य विकास अधिकारी सुमित यादव ने बताया कि जल ही जीवन है इसलिए हमें पानी की बचत के लिए आगे आना होगा. भूगर्भ जल स्तर को बनाए रखने के लिए सीसीएम तकनीक एक प्रभावी समाचान साबित हो रही है. वर्तमान में 192 प्लांटों में इस तकनीक को अपनाया गया है जिससे दो वर्षों में डेढ़ करोड़ लीटर पानी की बचत हुई है. हम लगातार उद्योगों को इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

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