अब लाइलाज नहीं रहा कैंसर, आधुनिक तकनीक ने बदली तस्वीर, तेजी से बढ़ रहा रिकवरी रेट, जानें डॉक्टर की सलाह

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अब लाइलाज नहीं रहा कैंसर, आधुनिक तकनीक ने बदली तस्वीर, तेजी से बढ़ रहा रिकवरी रेट, जानें डॉक्टर की सलाह


नोएडा: कभी कैंसर का नाम सुनते ही डर, निराशा और लाइलाज बीमारी की छवि सामने आ जाती थी, लेकिन बदलते समय के साथ कैंसर इलाज की दुनिया भी तेजी से बदल चुकी है. विश्व कैंसर दिवस पर हमने नोएडा के मेदांता हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से बात की. साथ ही पीजीआई में तैनात डॉक्टर नीता राधा कृष्ण से हमने खास बातचीत की और इसी बदलती हकीकत को जाना. इन सभी डॉक्टरों ने चौंकाने वाले तथ्य बताए और कैंसर बीमारी से जुड़ी कई अहम जानकारी भी साझा की. यह आज के दौर में कैंसर सिर्फ काबू में ही नहीं, बल्कि कई मामलों में पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है. इस साल की वैश्विक थीम ‘United by Unique’ के तहत यह संदेश दिया गया कि कैंसर भले ही एक बीमारी हो, लेकिन हर मरीज की जरूरत, शरीर और इलाज की योजना अलग होती है.

कैंसर को लेकर ये आंकड़े हैं चौंकाने वाले

आपको बता दें कि मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा के वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञों डॉ. सज्जन राजपुरोहित, डॉ. दीपक कुमार मित्तल, डॉ. आलोक ठक्कर, डॉ. वी. सीनू और डॉ. ईशा कौल और पीजीआईसीएच की डॉक्टर नीता राधा कृष्ण ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भारत में हर साल करीब 17 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं, जिनमें से 8 से 9 लाख लोगों की मौत हो जाती है. इसकी सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी है. डॉ. सज्जन राजपुरोहित के मुताबिक जानकारी न होने के कारण अधिकतर मरीज तीसरे या चौथे स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं, जबकि शुरुआती स्टेज में पहचान हो जाए तो इलाज कहीं ज्यादा आसान और असरदार हो जाता है.

250 बीमारियों का एक समूह है कैंसर

इन डॉक्टर्स ने बताया कि कैंसर कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि करीब 250 बीमारियों का समूह है. यह शरीर की अपनी कोशिकाओं से ही पैदा होता है, जब कोई सेल अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती है, तो वह ट्यूमर का रूप ले लेती है. कैंसर के मुख्य तीन कारण माने जाते हैं, पहला वातावरण से जुड़े कारण जैसे प्रदूषण और हानिकारक केमिकल, दूसरा पर्सनल फैक्टर जिसमें तंबाकू, शराब और खराब लाइफस्टाइल शामिल है, जिन्हें बदला जा सकता है और तीसरा जेनेटिक कारण, जो सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत मामलों में जिम्मेदार होता है. नियमित जांच और समय पर टेस्ट कई जानें बचा सकते हैं.

24 घंटे में दुगनी तेजी से फैलता है ये वाला कैंसर

नोएडा के सेक्टर 30 में स्थित पीजीआईसीएच की पीडियाट्रिक हेमाटोलॉजी ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉक्टर नीता राधा कृष्ण ने बताया कि सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ने वाले कैंसर की बात करें तो बच्चो में आमतौर पर ब्लड कैंसर हो होता है और सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारी लिंफोमा नाम से होती है, जो 24 घंटे में दुगनी तेजी से हो सकती है. हॉस्पिटल पंहुचते पंहुचते एडवांस स्टेज पर हो जाता है और कैंसर से निकलने वाला वेस्ट शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करने लगता है, अच्छी बात ये है कि समय से इलाज मिलने पर करीब 6  महीने में बीमारी खत्म भी हो जाती है.

पहले के मुकाबले कुछ कैंसर केस में रिकवरी रेट होता है ज्यादा

डॉक्टर नीता बताती हैं कि वही कुछ केटेगिरी के कैंसर में पहले के मुकाबले बेहतर इलाज के साथ रिकवरी रेट अच्छा हुआ है. डॉक्टर ने बताया कि इस बार सरकार ने अपने बजट में कैंसर की दवाई में छूट दी है, जोकि कुछ हाईरिस्क वाले कैंसर और उनकी मंहगी दवाई के ऊपर ही है. डॉक्टर नीता ने बताया कि कैंसर की दवाई, सपोर्ट केयर और ब्लड चढ़ना और क्वालिटी वाला इलाज बहुत मंहगा है. लेकिन नोएडा के पीजीआई में सिर्फ बच्चों के कैंसर का इलाज सरकार के अलग अलग फंड स्कीम के चलते पेरेंट्स पर बोझ नहीं पड़ने देता है, जहां कोई भी पेरेंट्स अपने बच्चे का इलाज 90 प्रतिशत या उससे अधिक की छूट पर किसी भी तरह के कैंसर का इलाज करवा सकते हैं.

कीमोथेरेपी के अलावा ये है एडवांस थेरेपी

मेदांता के एक्सपर्ट्स डॉक्टर्स की मानें तो अब कैंसर सिर्फ कीमोथेरेपी तक सीमित नहीं रह गया है. आज प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी, इम्यूनोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, सेलुलर थेरेपी और रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों ने इलाज को कहीं ज्यादा सटीक और सुरक्षित बना दिया है. डॉ. आलोक ठक्कर ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से अब गले, जीभ और वॉयस बॉक्स जैसे सेंसिटिव हिस्सों में भी कैंसर का इलाज संभव है, वो भी बिना चेहरे की बनावट या जरूरी अंगों को नुकसान पहुंचाए. वहीं डॉ. दीपक मित्तल ने कहा कि IGRT, IMRT और प्रोटॉन थेरेपी जैसी रेडिएशन तकनीकें ट्यूमर पर सीधा असर डालती हैं और आसपास के अंगों को सुरक्षित रखती हैं.

ये कैंसर बढ़ते हैं तेजी से

वही डॉ. ईशा कौल ने बताया कि ब्लड कैंसर और थायराइड कैंसर जैसे कुछ कैंसर बहुत तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए इनके शुरुआती लक्षण दिखते ही इलाज जरूरी है, जबकि कुछ कैंसर की रफ्तार धीमी होती है. वहीं डॉ. वी. सीनू ने जोर देकर कहा कि ब्रेस्ट और एंडोक्राइन कैंसर में शुरुआती पहचान और सही समय पर इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है.



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