अयोध्या: ‘हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम’, आजमगढ़, गाजीपुर समेत कई जिलों के नाम बदलने पर वेदांती का बड़ा बयान
अयोध्या: अयोध्या में 500 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद प्रभु राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की पूर्णता का संदेश पूरे विश्व के राम भक्तों को दिया, जिसके बाद अयोध्या से एक आवाज अब पूरे देश में बुलंद हो रही है. अयोध्या और आसपास के शहरों के नाम बदलने को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है. राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और भाजपा के पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कई शहरों व मोहल्लों के नाम बदलने की मांग उठाई है. वेदांती ने ये बात अयोध्या में बोला है, जिसमें उन्होंने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारणों का भी हवाला दिया.
दरअसल भाजपा की डबल इंजन की सरकार देश और प्रदेश में सनातन के संरक्षण को लेकर कार्य कर रही है. अब मुगल कालीन प्राचीन इस्लामी मोहल्ले और इन जनपदों के नाम बदले जाने को लेकर राम मंदिर आंदोलन के अगुआ रहे डॉ. रामविलास दास वेदांती अब नाम बदलने को लेकर मुखर नजर आ रहे हैं.
महापुरुषों के नाम पर होना चाहिए नामकरण
राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल भाजपा के पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने अयोध्या में बोलते हुए कहा कि राम की नगरी में स्थानों का नामकरण भगवान राम की परंपरा से जुड़े महापुरुषों के नाम पर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अयोध्या में गलियों व मोहल्लों का नाम राजा इक्ष्वाकु, राजा रघु और राजा दशरथ जैसे पूर्वजों के नाम पर रखा जाना चाहिए. डॉ. रामविलास दास वेदांती ने दावा किया कि मुगल शासनकाल में कई स्थानों के नाम बदले गए थे और आजादी के बाद उन्हें दोबारा भारतीय स्वरूप में लाने की जरूरत थी.
उन्होंने कहा कि आज केंद्र में भाजपा सरकार और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार कई स्थानों के नाम परिवर्तन पर कार्य कर रही है. हम चाहते हैं कि वाराणसी और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों पर नामकरण स्थानीय परंपराओं के अनुरूप हो. इतना ही नहीं, डॉक्टर रामविलास दास वेदांती ने इतना तक कह दिया कि आजमगढ़ का नाम आर्यनगर, गाजीपुर का नाम विश्वामित्र नगर और गाजियाबाद का नाम शंकराचार्य नगर किया जाए. शाहजहांपुर का नाम बदलकर परशुरामपुर करने की भी आवश्यकता है. वेदांती के बयान में अयोध्या के कुछ मोहल्लों के नामों को लेकर भी आपत्ति जताई गई. उन्होंने कहा कि धार्मिक महत्व वाले शहरों में पारंपरिक और सांस्कृतिक नामों को महत्व दिया जाना चाहिए.
अयोध्या के गलियों का ये हो नाम
राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा भाजपा के पूर्व सांसद डॉ. रामविलास वेदांती ने बताया कि प्रभु राम की नगरी में राजा दशरथ की नगरी में राम राज्य के इस नगरी में भगवान राम के परंपरा से संबंधित महापुरुषों का नाम रखना ही अच्छा है. अयोध्या में गालियों का नाम राजा इच्छकु के नाम से होना चाहिए, राजा रघु के नाम पर होना चाहिए, राजा दशरथ के नाम पर होना चाहिए, लेकिन जब मुगलों का आक्रमण हुआ, तब मुगलों ने पूरे देश में स्टेशन, गांव, जिला, तहसील का नाम परिवर्तन किया.
जब देश आजाद हुआ, तब सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पंडित जवाहरलाल नेहरू से कहा था कि अंग्रेजों के काल में जिन भारतीय स्थान का परिवर्तन किया गया था, उनका स्वदेशी नामकरण होना चाहिए, लेकिन उस दौरान पंडित नेहरू ने नहीं माना. उस दौरान कांग्रेस काल में चर्च और मदरसे में पैसा जाता था. कांग्रेस काल में ऐसा दृश्य दिखाई दिया था, लेकिन अब भाजपा की सरकार है. प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि सबकी तरफ धीरे-धीरे आ रही है और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई स्थानों के नामों को बदला है.
भारत और यूपी सरकार से आग्रह
डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि हम चाहते हैं कि वाराणसी में जैसे कई मोहल्ले मुस्लिम के नाम पर हैं, धार्मिक तीर्थ में इस प्रकार का दृश्य दिखाई देता है, जो आश्चर्य की बात है. हमारा भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से निवेदन है कि आजमगढ़ का नाम बदलकर आर्य नगर किया जाए, गाजीपुर को विश्वामित्र नगर, गाजियाबाद का नाम बदलकर शंकराचार्य नगर किया जाए. इसी प्रकार शाहजहां का नाम बदलकर परशुरामपुर किया जाए.
उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि देश में स्वदेशीकरण होना चाहिए, विदेशीकरण नहीं हो. रामविलास दास वेदांती ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अयोध्या में इस्लामीकरण को समाप्त करना चाहिए. ‘हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम’, राम की नगरी में मुस्लिम मोहल्लों की क्या आवश्यकता है. इस वजह से उनके नाम को हटाकर अयोध्या के परंपरा के अनुसार नामकरण किया जाए.