आलू की खेती में झुलसा रोग का बढ़ गया है खतरा, किसान करें ये काम, वरना फसल हो जाएगी बर्बाद
Last Updated:
Aloo Ki Kheti: आलू की अगेती फसल में झुलसा रोग का खतरा बढ़ गया है. नई पत्तियों पर भूरे धब्बे और फफूंदी इसके लक्षण हैं. कृषि अधिकारी किसानों को मैंकोजेब दवा का छिड़काव करने और NPK खाद देने की सलाह दे रहे हैं ताकि फसल सुरक्षित रहे.
उत्तर प्रदेश के जनपद कौशाम्बी में आलू की फसल का उत्पादन अधिक किसान करते हैं. इन दिनों किसान आलू की फसल की बुवाई कर रहे हैं. कुछ किसान आलू की अगेती फसल बुवाई कर चुके हैं. जो किसान आलू की अगेती फसल की बुवाई कर चुके हैं उनकी फसल में आलू की पत्तियां निकल चुकी हैं. इसमें सबसे पहले पत्तियों मे झूलसा रोग लगता है. जिसके कारण आलू की फसल सही से तैयार नहीं हो पाती है. जिसके कारण फसल मे उत्पादन कम हो जाता है और किसानों को काफ़ी नुकसान झेलना पड़ता है. इसके लिए किसान तत्काल कृषि विभाग से जानकारी लेकर दवा का छिड़काव करें. जिससे फसल का बचाव हो सके.
आलू के झुलसा रोग की पहचान करने के लिए किसान को आलू की नई पत्तियां जो निकलती हैं इनमें भूरे रंग के धब्बे होने लगते हैं. आलू की पत्तियों में भूरा रंग जैसे धब्बे दिखाई देने लगते हैं. जो अक्सर पीले घेरे से घिरे होते हैं. रोग बढ़ने पर ये धब्बे पत्तियों के किनारों पर या पूरी पत्ती को काला कर देते हैं और तनों पर भी दिखाई देते हैं. पत्तियों की सतह पर सफेद फफूंदी की परत दिखने लगती है और आलू का पौधा गलकर गिर सकता है.
किसान अफसर अली ने बताया कि आलू की बुवाई के बाद किसान को फसलों मे बहुत ही ध्यान रखने की जरूरत होती है. किसान ने बताया कि अगर फसल में रोग लगता है तो उसमें कीटाणु वाली दवा कृषि बीज गोदाम से लेकर फसलों में समय पर छिड़काव करना देना चाहिए. इसके लिए कृषि विभाग से जानकारी लेकर आलू के खेतों मे दवा डाल देनी चाहिए. ताकि फसल का नुकसान न हो पाए.
कृषि अधिकारी मोहनलाल ने बताया कि किसान अगेती आलू की बुवाई कर चुके हैं. यह बुवाई लगभग एक महीना पहले ही हो चुकी है और अब इस समय आलू के तने एवं पत्तियां भी निकलना शुरू हो गई हैं. आलू की फसल में लगने वाली सबसे बड़ी बीमारी झुलसा रोग कहा जाता है. आलू की फसल में दो तरह से रोग लगते हैं एक अगेती आलू की फसल में तो दूसरी पछेती आलू की फसल में. अगेती आलू की फसल में सबसे ज्यादा झुलसा रोग की शिकायत होती है. इस रोग से बचने के लिए मैंकोजेब नाम की दवा का एक बीघे के हिसाब से 250ग्राम दवा का इस्तेमाल किया जाता है. इस दवा को पानी के घोल में मिलाकर पूरे खेतों में इसका छिड़काव करें. इससे फसलों में लगने वाला झुलसा रोग पूरी तरह से खत्म हो जाता है.
कृषि अधिकारी मोहनलाल ने बताया कि आलू की फसल में लगने वाला झुलसा रोग की पहचान करने के लिए आलू की फसल में शुरुआत में ही निकलने वाली पत्तियां भूरे रंग की गोला आकार में हो जाती है और यह रोग पूरी पत्तियों में धीरे-धीरे से फैलना शुरू हो जाता है. इस तरह से आलू के पौधे धीरे-धीरे सूखकर पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं. यह आलू के निकलने वाले कंद पर भी असर करता है. इससे आलू का कंद बढ़ना रुक जाता है. इसके लिए किसान को मैंकोजेब 74% दवा का इस्तेमाल करें. इससे फसलों में लगने वाला रोग पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.
आलू की फसल में कंद की बढ़वार के लिए प्रति बीघे के हिसाब से 12-15 किलो NPK नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश का जो कैम्बिनेशन होता है. वह सोसाइटी से मिल जाता है.क्योंकि आलू के फसल के लिए पोटास बहुत ही जरूरी होता है.
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल… और पढ़ें