एक खर्चे में दो कमाई, माया देवी ने रेशम कीट पालन के साथ अपनाई सहफसली खेती, कमाया मुनाफा!
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बहराइच जिले की महिला किसान माया देवी ने सहफसली खेती का अनोखा तरीका अपनाकर अपनी आय बढ़ा ली है. उन्होंने रेशम कीट पालन के लिए शहतूत के पौधे लगाए और बीच की खाली जमीन पर कद्दू वर्गीय फसलों की खेती शुरू कर दी. मिर्जापुर से मिले आइडिया और वैज्ञानिकों की सलाह से शुरू की गई इस तकनीक से उन्हें रेशम कीट पालन से ही इस साल करीब 35 हजार रुपये की आमदनी हुई है, जबकि सहफसली खेती से अतिरिक्त लाभ भी मिल रहा है.
बहराइच. भारत में किसान अब अलग-अलग तकनीक से अपनी आय को बढ़ा रहे हैं. खेती के नए-नए तरीके आजमा कर किसान अपनी लागत को कम और मुनाफे को बढ़ा रहे हैं, इसी कड़ी में बहराइच जिले की रहने वाली महिला किसान ने भी गजब का जुगाड़ लगाकर अपनी आय को एक खर्चे में दुगना किया है. दरअसल, इन्होंने अपने खेत में रेशम कीट पालन को लेकर शहतूत के पौधे लगाए और बीच-बीच में बचे हुए जगह को भी इन्होंने कद्दू वर्गीय की खेती में इस्तेमाल कर लिया.
मिर्जापुर से मिला आइडिया
बहराइच जिले के कटरा बहादुरगंज गांव की रहने वाली महिला माया देवी एक समृद्ध किसान है और खुद बहराइच जिले में कृषि दीदी के पद पर काम कर रही हैं. समय-समय पर कृषि को और बेहतर बनाने के लिए यह कृषि के विभिन्न कार्यक्रमों में जाया करती है. कृषि के कार्यक्रम में यह एक बार मिर्जापुर गई हुई थी जहां पर इन्होंने रेशम कीट पालन के साथ-साथ सहफसली की जानकारी ली और फिर वापस लौटकर उसको जमीन पर उतार दिया.
जानकारी मिलने के बाद कर दिया शुरू
मिर्जापुर से आइडिया मिलने के बाद जब किसान माया देवी बहराइच पहुंची तो इन्होंने बहराइच में कृषि विज्ञान केंद्र से भी वैज्ञानिकों से सलाह ली, और वैज्ञानिकों ने भी बखूबी माया देवी को समझाया. फिर माया देवी ने शहतूत के पौधे लाइन से लाइन में अपने खेतों में लगा दिए और बीच की बची हुई जमीन पर इन्होंने सहफसली खेती शुरू कर दी. अब पौधे बड़े होकर रेशम कीट पालन से भी अच्छी कमाई हो रही है, जिसमें अब तक इन्होंने इस साल 35000 रुपए तक आमदनी की है. सहफसली की खेती से भी इनकम हो रही है. माया देवी का कहना है कि अगर खेती में आगे बढ़ना है तो एक खेती से काम नहीं चलता है, महंगाई का जमाना है तो दिमाग तो लगाना ही पड़ेगा.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें