कंटीला नहीं मखमली है नागफनी का ये पौधा, साल भर में महज 1 सेंटीमीटर की होती है ग्रोथ
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Pilibhit News: पीलीभीत के रहने वाले हर्षल सिंह को कैक्टस मैन के नाम से जाना जाता है. हर्षल को अपने बेहतरीन कैक्टस कलेक्शन के लिए पहचान मिली है. हर्षल से लोकल 18 से कहा कि उनके इस सफर की शुरुआत. उनके पिता के शौक के चलते हुई. उनके पिता को भी कैक्टस कलेक्शन का शौक था.
आमतौर पर लोगों के बीच ये मान्यता होती है कि नागफनी का पौधा कंटीला होने के चलते नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है. मगर नागफनी की एक प्रजाति ऐसी भी होती है जो कंटीली नहीं बल्कि मखमली होती है. वहीं इसका पौधा भी बहुत कम ग्रोथ करता है. पीलीभीत के रहने वाले हर्षल सिंह को कैक्टस मैन के नाम से जाना जाता है. हर्षल को अपने बेहतरीन कैक्टस कलेक्शन के लिए यह पहचान मिली है.
हर्षल से लोकल 18 से कहा कि उनके इस सफर की शुरुआत. उनके पिता के शौक के चलते हुई. उनके पिता को भी कैक्टस कलेक्शन का शौक था. वह बचपन से ही कैक्टस के बीच पले बढ़े. उन्होंने अपने पिता के शौक को आगे बढ़ाया और देश विदेश की दुर्लभ प्रजातियों के कैक्टस को अपने पॉली गार्डन में सजाना शुरू कर दिया. उनके गार्डन में 40 साल पुराना वेरल कैक्टस है. वहीं 35 साल पुराना एरियो कार्पस भी मौजूद है. हर्षल ने बताया कि ये पौधे मूल रूप से भारत में नहीं पाए जाते. इन कैक्टस में से अधिकतम प्रजातियां नॉर्थ अमेरिका व साउथ अमेरिका में पाई जाती हैं. ऐसे में, इन पौधों में खाद व पानी भी वहां के मौसम के अनुसार ही लगाया जाता है. हर्षल ने विशेष तौर पर कैक्टस की इन 450 प्रजातियों के लिए अलग से एक टाइम टेबल बनाया है.
नागफनी का विशेष पौधा
हर्षल के पॉली हाउस में मेमलारिया प्रजाति के कैक्टस का भी खासा कलेक्शन है. ऐसा माना जाता है कि यह प्रजाति कैक्टस के सबसे बड़े वंशों में से एक है. इस प्रजाति में आमतौर पर छोटे, गोलाकार (Globular) या बेलनाकार (Cylindrical) पौधे होते हैं. इनकी ऊँचाई 1 इंच से लेकर 16 इंच तक हो सकती है, लेकिन अधिकांश 12 इंच से कम ही बढ़ते हैं. अगर इसके सालाना ग्रोथ की बात करें तो यह एक साल में महज 1 सेंटीमीटर ही बढ़ते हैं. इसके कुछ पौधे ऐसे भी होते हैं जो कटीले न होकर मख़मली नज़र आते हैं, वहीं फूल आने के दौरान ये बेहद आकर्षक नजर आते हैं.