कानून अंधा है दोनों को बरी नहीं करना चाहिए था… निठारी कांड में सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने के बाद लोगों का फूटा गुस्सा
नोएडा: देश को हिला देने वाले निठारी कांड पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सह-आरोपी सुरेंद्र कोली को भी बरी कर दिया है. कोर्ट ने कोली की क्यूरेटिव पिटिशन स्वीकार करते हुए उसे रिहा करने के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही उन सभी पुराने फैसलों और आदेशों को भी रद्द कर दिया गया है, जिनमें कोली को दोषी ठहराया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी 2011 को दिया गया वह फैसला और 28 अक्टूबर 2014 का वह आदेश भी निरस्त कर दिया, जिसमें उसकी सजा और पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया गया था. इस फैसले के साथ ही 2006 के इस कुख्यात मामले का एक और अध्याय न्यायिक रूप से खत्म हो गया, लेकिन पीड़ित परिवार और गांववासियों के दिलों का जख्म हमेशा के लिया हरा ही बना रहेगा.
नाले में मिले थे 19 कंकाल 16 पर चला था केस
दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित D-5 कोठी से सटे नाले और परिसर से कई बच्चों के कंकाल और अवशेष बरामद हुए थे. देश भर में यह खबर जंगल की आग की तरह फैली थी. घरों से गायब होती बच्चियां, किराएदार और मजदूर वर्ग की लड़कियां, और फिर अचानक ‘चुप्पी’ जिसने पूरे भारत की आत्मा को झिंझोड़ दिया था. नाले से कुल 19 कंकाल बरामद हुए लेकिन केस सिर्फ 16 के आधार पर चला.
मोनिंदर सिंह पंढेर, सुरेंद्र कोली पर हत्या, रेप और अमानवीय कृत्यों के कुल 16 मामलों में मुकदमे चले, जिनमें उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी. लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं की परतें खुलती गईं, जांच एजेंसियों की खामियां सामने आती गईं, और अब आखिर में अदालत ने कहा सबूत नहीं है, जांच बकवास है जिसके आधार पर दोनों को रिहाई दी गई.
पीड़ित परिवार का झलक पड़ा दर्द
लेकिन इस फैसले ने उन परिवार और गांववासियों के घावों को कुरेद दिया है, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया, और न्याय की उम्मीद में वर्षों की जिंदगी कोर्ट-कचहरियों के बाहर बिताई. एक पीड़ित बच्ची ज्योति की मां सुनीता ने रोते हुए कहा, दोनों को बरी नहीं होना चाहिए था. उसने खुद पुलिस थाने में बोला था कि बच्ची मैंने मारी है. अगर ये सबूत नहीं है, तो और क्या है! ये शब्द उस माता के हैं, जो इंसाफ की भाषा नहीं जानती.
गांव निवासियों दिखा रोष
पीड़ित परिवार सुनीता और झब्बू जिन्होंने अपनी एक बेटी को खोया और निठारी निवासी सुधीर रॉय, विक्की, अमित पंडित, भगवानदास गौतम से जब इस फैसले पर बात की गई तो आक्रोश साफ नजर आया. लोगों ने कहा कि यह मामला सिर्फ कोर्ट या पुलिस की फाइल का नहीं था. यह हमारी आंखों के सामने की सच्चाई थी. उन्होंने कहा, दुनिया ने देखा कि कोठी के पास के नाले से बोरी भर-भर कर कंकाल निकाले गए.
गांव की बच्चियां गायब होती रहीं. उनके कंकाल भी वहीं से मिले. सुरेंद्र कोहली ने खुद कबूल किया था कि उसने रेप और मर्डर किए. फिर कोर्ट कैसे कह रही है कि सबूत नहीं हैं! लोगों का कहना है कि जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी नाकामी इस केस में साफ नजर आती है. और ये देश दुनिया के अन्य कई केस मिस्ट्री की तरह बनकर रह जाएगा.
पंढेर ने कबूला कि उसकी कोठी में हुई थी हत्याएं
आपको बता दें कि इस मामले का दूसरा चर्चित नाम मोनिंदर सिंह पंढेर जो बीते 30 जुलाई 2025 को पहले ही बरी हो चुका है. अब गांव और पीड़ित परिवार का कहना है कि कोली की रिहाई से पूरे मामले की जांच, सिस्टम, पुलिस और न्यायपालिका तीनों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो गया है. पंढेर ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कई बातें खुलकर मानीं, लेकिन जिम्मेदारी से खुद को अलग कर लिया. उसने स्वीकार किया कि वह अपनी कोठी में कॉलगर्ल बुलाता था. उसने यह भी बताया कि उसके घर में अक्सर उसके दोस्त या भतीजे रुका करते थे. उसके अनुसार, वह अधिकतर समय यात्राओं या बिजनेस में व्यस्त रहता था, जबकि सभी हत्या उसकी गैरमौजूदगी में हुई.
पंढेर ने कहा कई लड़कियां सुख-दुख आती थी बांटने
पंढेर ने बताया कि डेडबॉडी सुरेंद्र कोली के बाथरूम में रहती थीं, जो फर्स्ट फ्लोर पर था. किसी को कुछ पता नहीं चलता था. वह उनको मौका देखकर डिस्पोज़ कर देता था. कैसे करता था ये कभी पता नहीं चला. पंढेर ने बताया कि उसने प्राइवेट डिटेक्टिव तक किराए पर रखे थे, ताकि वह खुद को शक से बाहर साबित कर सके. पंढेर का कहना है कि कानूनी तौर पर मैं क्लियर हूं, लेकिन कलंक पूरी जिंदगी रहेगा.
उनसे ये भी बताया कि किसी को गलत तरीके से नहीं बुलाया उसकी दोस्ती कई लड़कियों से थी, जो उसके पास ‘रिलैक्स’ करने आती थीं. उसके अपने शब्दों में यह सिर्फ सेक्स नहीं था. रिश्ता दोस्ती का था. हर सुख दुख शेयर करती थी. उनमें से कई के परिवार वाले भी जानते थे. उसने यह स्वीकार भी किया कि जिन लड़कियों को कोली ने बुलाया, वे अंदर नहीं गईं शायद यही वजह है कि वे बच गईं.
कुछ इस तरह चला केस
आपको बता दें कि एक युवती के लापता की पहली स्थानीय कोर्ट के आदेश पर 7 अक्टूबर 2006 में पहली FIR दर्ज हुई. 29 दिसंबर 2006 को बोरी में भरकर कंकाल मिले. 2007 में CBI जांच आई. 2008 में दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई. 2012, 2014, 2015 में फैसले बदलते गए. 2023 में हाईकोर्ट ने पंढेर और कोली दोनों को बरी कर दिया. और अब 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी यही फैसला बरकरार रखा.