किसानों के लिए सिर्फ फसल नहीं, औषधीय पौधे भी बनेंगे कमाई का जरिया, खेत की बची जगह का ऐसे करें इस्तेमाल
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Smart farming: व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों के लिए खेतों से प्राप्त होने वाली उपज उनकी कमाई का एक मुख्य जरिया होता है. लेकिन किसान अपने खेतों में बची हुई जगह का इस्तेमाल करते हुए भी अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. बची हुई जगह पर कुछ औषधीय पौधे लगाकर दोहरा दुगना मुनाफा कमा सकते हैं.
आमतौर पर किसानों के द्वारा एक सीजन में किसी एक फल की खेती की जाती है. समय से उपज प्राप्त होने के बाद उसे मार्केट में बेचकर मुनाफा कमाया जाता है. लेकिन किसान समय रहते कुछ अन्य उपायों से अपनी कमाई को बढ़ा सकते हैं.

उनमें से एक है खेतों में बची हुई अतिरिक्त जगह का इस्तेमाल, किसान अपने खेतों में बची हुई अतिरिक्त जगह का इस्तेमाल करते हुए कुछ औषधीय पौधे लगा सकते हैं जो कुछ ही समय में उनके कमाई का एक अतिरिक्त साधन बन सकता है.आज हम आपको बताएंगे कौन से ऐसी औषधि वाले पौधे हैं जिसकी मार्केट में अधिक डिमांड है.

किसान अगर अपनी फसल के साथ-साथ खेतों में बची हुई जगह का उपयोग करते हुए अतिरिक्त कमाई करना चाहते हैं तो उनके लिए सहजन के पौधे बेहद फायदेमंद हो सकते हैं. सहजन के पौधे स्वास्थ्य गुणों से भरपूर होते हैं. इसमें कई तरह के विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट अच्छा पाए जाते हैं जो कई रोगों में बेहद फायदेमंद हो सकते हैं.

ऐसे में खेतों में बची हुई जगह पर सहजन का पौधा लगाकर किसान इसके फल और पत्तियों की बिक्री कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. यह पेड़ लगाने के तकरीबन 10 महीने में तैयार हो जाता है. जिसके बाद इसकी पत्तियों और फलों की बिक्री की जा सकती है. यहां तक की आयुर्वेद के अनुसार इस पेड़ की छाल और जड़ें भी बेहद उपयोगी मानी जाती है.

किसान अपने खेतों में अकरकरा की खेती भी कर सकते हैं. इसके पौधे की जड़ों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दावों को बनाने में किया जाता है. यह कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है. मार्केट में इसके बीज और डंठल की मांग काफी अधिक होती है. यह 6 से 8 महीनो में तैयार हो जाता है और मार्केट में अच्छे दामों पर बेचा जा सकता है.

किसान अपने खेतों में बची हुई जगह पर अश्वगंधा का भी पौधा लगा सकते हैं. यह एक झाड़ीदार पौधा होता है. आयुर्वेद में अश्वगंधा एक प्रसिद्ध जड़ी बूटी है जो शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है. इसके जड़ पत्ती फल और बीज औषधि के रूप में उपयोग किए जाते हैं. ऐसे में यह खेती भी किसानों के लिए मुनाफे का सौदा हो सकती है.

अगर किसान अपने खेत में बची हुई जगह का इस्तेमाल करना चाहे तो वह इसमें तुलसी की खेती भी कर सकते हैं. यह एक ऐसी फसल है जो तकरीबन 90 से 100 दिनों के बीच में तैयार हो जाती है और इसकी मार्केट में खूब अधिक डिमांड होती है. तुलसी के पत्तों से लेकर जड़ों तक का उपयोग कई तरह की दवाओं को बनाने में किया जाता है.

किसान अपने खेतों में शतावर के पौधे भी लगा सकते हैं. यह एक औषधिय फल है. इसका प्रयोग कई तरह की दवाइयां को बनाने में किया जाता है, किसान इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं, बड़े पैमाने पर शतावर की खेती करते हुए किसान एक एकड़ में 5 से 6 लख रुपए तक की कमाई आसानी से कर सकते हैं. हालांकि इस पौधे को तैयार होने में तकरीबन 1 साल से अधिक का समय लगता है.