किसी पिकनिक स्पॉट से कम नहीं है यह पार्क! एक बार जाने के बाद नहीं करेगा वापस आने का मन
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बहराइच में बना महाराजा सुहेलदेव स्मारक स्थल अब पूरी तरह तैयार हो चुका है और यहां का खूबसूरत वातावरण लोगों को लखनऊ, दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों की फील देता है. पार्क में प्रवेश करते ही भव्य गेट, झील के किनारे बने सुंदर गुंबद, किड्स प्ले एरिया और शानदार फुहारा आकर्षण का केंद्र हैं. यहां 40 फीट ऊंची घोड़े पर सवार महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा सबसे खास है, जिसके साथ लोग फोटो खिंचवाना नहीं भूलते. साथ ही रास्ते में शिवजी, हनुमान जी सहित कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी बनी हैं, जो इस स्थान को और भी खास बनाती हैं.
वैसे तो इस पार्क का इंतजार लोगों को लंबे समय से था, क्योंकि इसका निर्माण पिछले कई सालों से चल रहा था, जो कि अब बनकर पूरा हो गया है. जहां जाने के बाद ऐसा लगता ही नहीं है कि बहराइच के किसी पार्क में हम आए हुए हैं. बिल्कुल बाहर जैसी फीलिंग आती है जैसे मानो लखनऊ, दिल्ली, मुंबई पहुंच गए हो.पार्क के अंदर दाखिल होते ही सबसे पहले आपको सुंदर सा बड़ा सा गेट मिलेगा और लेफ्ट और राइट साइड बनी हुई छोटी-छोटी सुंदर सी दुकानें जिनका संचालन भी जल्द शुरू होने वाला है.

महाराजा सुहेलदेव स्मारक स्थल में झील के किनारे सुंदर वातावरण और बने हुए गुंबद आपको निहारने को मजबूर कर देंगे. जहां पर बैठकर आप वातावरण की हसीन वादियों में फैमिली फोटो ले सकते हैं. इसके अलावा यहां पर शांत वातावरण होने के साथ-साथ मन को भी शांति मिलती है और एक अच्छे एहसास का अनुभव होता है. इस तरह के कई गुंबद बने हुए हैं, लेकिन ज्यादातर लोग बीच वाले बने गुंबद पर जाकर सेल्फी लेते हैं और बैठते हैं जहां पर घाट नंबर तीन लिखा हुआ है.

अगर आप फैमिली के साथ गए हैं तो बच्चों के लिए भी यहां पर किड्स प्ले एरिया बनाया गया है. यहां पर बच्चों के लिए झूले, स्लाइडिंग, और भी कई एडवेंचर टाइप के झूले लगाए गए हैं. जहां पर बच्चों का मन लगता है और बच्चे घण्टों तक यहां पर खेलने की जिद करते हैं, तो अगर फैमिली के साथ आए तो बच्चों को किड्स प्ले एरिया में जरूर घुमाए.
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इस पार्क में आने वाला हर वह शख्स इच्छा रखता है की सबसे पहले महाराजा सुहेल देव की घोड़े पर सवार 40 फीट की प्रतिमा को देखें. इस भव्य प्रतिमा के साथ लोग आते ही सबसे पहले फोटो खिंचवाते है. प्रतिमा पर महाराजा सुहेलदेव घोड़े पर सवार है एक हाथों में भाला तो दूसरे हाथों में तलवार है. जिस प्रतिमा को देखने के लिए आपको अपना पूरा सिर ऊपर उठाना पड़ेगा और फोटो लेने के लिए थोड़ा पीछे आना पड़ेगा. तो यहां जाएं तो महाराजा सुहेलदेव की इस प्रतिमा के साथ फोटो खींचना ना भूले.

शिवजी, हनुमान जी सहित यहां पर कई देवी देवताओं की प्रतिमा भी रास्ते के दोनों ओर बनाई गई है और आगे बढ़ते ही एक बड़ा सा फुहारा इसमें सुंदर धार से पानी निकलता है. यहां भी लोग खड़े होकर सेल्फी लेते हैं और थोड़ी देर बैठकर रेस्ट करते हैं तो अगर आप भी इस पार्क में जाएं तो भगवान के दर्शन करने के साथ-साथ इस फुहारे का आनंद जरूर लें. वही फुहारे के पीछे बात करें तो आपको एक सीढ़ियां दिखाई देगी जो सीधे महाराजा सुहेलदेव की सबसे पुरानी प्रतिमा के पास ले जाती है. अंदर की ओर जाएंगे तो सफेद घोड़े पर महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा आपको दिखाई देगी जब इस स्मारक स्थल की शुरुआत हुई तो सबसे पहले यही प्रतिमा बनाई गई थी.