कृष्ण नगरी में बम-बम भोले के जयकारे, कावड़ियों पर पुष्प वर्षा कर लोगों ने किया स्वागत
मथुरा: योगीराज श्री कृष्ण की नगरी में महाशिवरात्रि की धूम रही. कान्हा की नगरी भगवान शंकर के जयकारों से गूंज उठी. मथुरा के सभी शिव देवालयों पर भक्तों के श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा, तो वहीं जलाभिषेक के बाद कावड़ियों ने भगवान शंकर से मनौती मांगी. इस कावर यात्रा में पुरुषों के साथ-साथ स्त्री भी कावड़ लेकर अपने गंतव्य तक पहुंची. गांव की परिक्रमा करते हुए भगवान शंकर के मंदिर में जलाभिषेक किया.
कावड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों पर की गई पुष्प वर्षा
रविवार के दिन भगवान योगीराज कृष्ण की नगरी बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठी. जिधर देखो उधर ही शिव भक्तों का ताता आपको देखने को मिलेगा. मथुरा के मधुबन महुली में भी सैकड़ों की संख्या में कावड़ लेकर पहुंचे स्त्री और पुरुषों ने जहां अपने कावड़ को विश्राम कराया, तो दूसरी ओर कावड़ यात्रा निकालकर भगवान शंकर की आराधना में लीन नजर आए.
इस बार पुरुषों से महिलाएं भी कम नहीं दिखीं और गंगा जी से कावड़ लेकर मधुबन महोली पहुंचीं. उन्होंने भगवान शंकर की आराधना करते हुए जलाभिषेक किया. जलाभिषेक से पूर्व गांव में कावड़ यात्रा निकाली गई. भगवान शंकर के भजनों पर लोग नाचते हुए, थिरकते हुए, गाते हुए नजर आए. ग्रामीणों ने भी इस कावड़ यात्रा पर पुष्प वर्षा की. पुष्प वर्षा कर लोगों ने कावड़ियों का उत्साह वर्धन किया.
श्रद्धालुओं का मन प्रफुल्लित
वही गांव मधुबन महोली निवासी कांवड़ियों से जब बातचीत की गई, तो उन्होंने अपने अलग-अलग विचार रखें. विष्णु नाम के कावड़िया ने लोकल 18 से बातचीत की और बताया कि पहली बार कावड़ लेकर आया हूं. मन में भगवान शंकर की आस्था है. कुछ मन्नत है, जो पूरी हो जाएगी तो दोबारा से कावड़ लेकर आऊंगा.
30 साल से कावड़ लेकर आ रहे भक्त
वहीं जमुना पिछले 30 वर्षों से कावड़ लेकर आ रहे हैं. भगवान शंकर में उनकी आस्था है. जमुना ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया कि जो भी शंकर से मांगा, वह शंकर ने दिया है. 30 साल हो गए, लगातार कावड़ लेकर आ रहा हूं. वहीं दूसरी ओर राकेश नाम के व्यक्ति ने बताया कि मन प्रफुल्लित होता है.
उन्होंने कहा कि भगवान शंकर की कावड़ जब लाते हैं, तो मन में एक अलग ही अनुभूति होती है. भगवान शिव शंकर कावड़ लाने के लिए प्रेरित करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि इस बार तो कोई इरादा नहीं था कावड़ लेकर आने का, लेकिन भगवान शंकर की ऐसी कृपा हुई कि अचानक प्रोग्राम बना और हम कावड़ लेकर अपने गांव महोली पहुंच गए.